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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 289, कुल 609 में से

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पृष्ठ 289

१९० सिद्धान्त दर्पण
ब्रह्मात्रयस्य (४।५।६) राधाषटक (१६।१७।१८।१९।२०।२१)
स्वहेः (९) करस्य (१३) चित्राया (१४) वरुणस्य (२४)
च विक्षेपो याम्यः सौम्येऽपरर्क्षाणाम् । ११ ।
निम्नलिखित नक्षत्रों का विक्षेप दक्षिण दिशा में होता है ।
(४, ५, ६, १६, १७, १८, १९, २०, २१, ९, १३, १४, २४)
बाकी नक्षत्रों का विक्षेप उत्तर दिशा में होता है । (यह पहले ही दिखाया
जा चुका है ।
रामा (१-३) गुणाः (२-३) षड् (३ -६)
विषया (४-५) हुताशा (५-३)
रूपं (६-१) शरा (७-५) वह्नय
(८-३) आशुगाश्च (९-५)
बाणा (१०-५) दृशौ (११-२) युग्म
(११-२) मथेन्द्रियाणि (१३-५)
धरा (१४-१) स्थिरा (१५-१) पञ्च
(१६-५) नगाश्च (१७-७) रामाः (१८-३) । १२ ।
१. अश्विनी (३). २. भरणी (३) ३ कृत्तिका (६) ४. रोहिणी (५), ५ मृगशिरा
(३) ६. आर्द्रा (१), ७ पुनर्वसु (५) ८ पुष्य (३) अश्लेषा (५), १० मघा (५) ११.
पूर्वाफाल्गुनी (२), १२. उत्तराफाल्गुनी (२), १३. हस्त (५) चित्रा (१) १५. स्वाती
(१), विशाखा (५) ५ अनुराधा (७) १८. ज्येष्ठा (३)
नन्दाः (१९-९) समुद्राः (२०-४) निगमा (२१-४) गुणाश्च (२-३)
रामा (२२-३) खाग्न भुवौ (२४- १००) भुजौ (२५-२) च
दृशौ (२६-२) द्विरामा (२७-३२) इति तारकाणां
संख्यादिता राभिजिता क्रमेण । १३ ।
१९. मूल (९) २०. पूर्वाषाढ़ (४) उत्तराषाढ (४) अभिजित् (३) २२. श्रवण
(३) २३. धनिष्ठा (५) २४. शतभिष (१००) २५ पूर्वभाद्रपद (२) २६. उत्तरभाद्रपद
(२) २७ रेवती (३२) ये विभिन्न नक्षत्रों में तारों की संख्या है ।
जीवर्क्षं (८) मध्ये बहुतारकाणां स्थितावपि व्यक्ति तयाविनाद्यैः ।
एकत्वमुक्तं कतिचिद् विभिन्न संख्यानि भानोत्यपरे वदन्ति । १४ ।
८. पुष्य नक्षत्र में अनेक तारा रहने पर भी वे स्पष्ट नहीं दीखने के कारण मेरे
मत से एक ही तारा है । कई आचार्य अनेक नक्षत्रों में ताराओं की संख्या भिन्न
भिन्न कहते हैं ।
ऋक्ष चयस्याकृतयः प्रत्यय हेतो तथा भिधास्यन्ते ।
तुर गवदन (१) त्रिकोश (२) ज्वलनशिखा (३) सदृक्षास्ताः । १५ ।
अब नक्षत्रों की आकृतिका वर्णन किया जाता है । १. अश्विनी का रूप घोड़े