सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभ ग्रह योग वर्णनम् १८९
त्रिभानि (२२-२७३) सार्द्ध पञ्चाष्ट पक्षा (२३-२८५।३०)
व्याघ्य्र्य ष्टभूगुणः (२४-३१७।४५) दृग् दन्ता (२५-३२२)
दन्ति गीर्वाणाः (२६-३३८) शून्यं (२७-०) साभिजितामिति । ६ ।
२२. श्रवण (२७३) २३. धनिष्ठा (२८५।३०) २४ शतभिष् (३१७।४५) २५.
पूर्व भाद्रपद (३२२) २६. उत्तर भाद्रपद (३३८), २७. रेवती (०)
क्रान्त्यान्तादेषामथविक्षेपांशान्लाढय
दिश (१-१०।३०) ईशाः (२-११)
सांग्र्य व्ययः (३-४।१५) सहाद्धेन्द्रियाणि
(४-५।३०) सार्द्धानलक्षितयः (५-१३।४०) ।७ ।
नक्षत्र मण्डल के योगतारा का शर या क्रान्ति वृत्त से उत्तर या दक्षिण दिशा
में उनकी दूरी कही जाती है ।
१ अश्विनी (उ-१०।३०) २. भरणी (उ-११) ३. कृत्तिका (३-४।१५) ४. रोहिणी
(द-५।३७) ५. मृगशिरा (द. १३।३०)
त्र्यंशोन तर्क चन्द्राः (६-१५।४०) सार्द्धरसाः
(७.६।३०) सांघ्रिरूप (८- १।१५) मकार्श्व (९-१२)
रूपदलंनिजषष्ठांशोनित (१०-०।२२) मर्थेन्दवो
(११-१२) विश्वे (१२-१३) । ८ ।
६. आर्द्रा (द-१५।४०) ७. पुनर्व (उ-६।३०) ९ पुष्प उत्तर १।१५) ९. अश्लेषा
(द-१२), १०. मघा (उ-०।१२) ११. १२. उत्तरा फाल्गुनी (उ-१३।०)
रुद्राः (१३-११) सरसांशदृशौ (१४-२।१०)
देवा (१५-३३) बाहू (१६-२) भुजौ (१७-२२)
सपादकृता (१८-४।१५) सदलानलरजनीशा (१९-१३।३०)
सार्द्धांगा (२०-६।३०) न्यत्रिभागकृताः (२१.३।४०) । ९ ।
१३. हस्त (द-११।०) चित्रा (द-२।१०) स्वाती (उ.३३।०) १६. विशाखा (द.
२।०) १७. अनुराधा (द.२।०) १८. ज्येष्ठा (द. ४।१५) १९.मूल (द-१३।३०), २०.
पूर्वाषाढ़ (द.६।३०), २१. उत्तराषाढ़ (द- ३।४०)
द्वाषष्टि (०-६२) रभ्ररामा (२२-३०
षट्त्रिंश (२३-३६ ) च्छितिदीधितेरूयंशः
(२४-०।२०) दन्ता (२५-३२)गजभुज संख्या
(२६-२८) शरा (२७-५।०) इतिशराक्रमाभानाम् । १० ।
०. अभिजित् (उ-६२।०) २२. श्रवण (उ-३०।०, ) २३. धनिष्ठा (उ- ३६।०)
२४. शतभिष् (द-०।२०) पूर्वभाद्रपद (उ-३२।०) २६. उत्तर भाद्रपद (उ-२८) २७
रेवती (उ.५।०) ।