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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१८४ सिद्धान्त दर्पण
पर याम्य और चन्द्र से उत्तर ग्रह रहने पर सौम्य शर होगा । परिलेख के लिए
स्फुट शर-
तारा ग्रहाणां सर्वेषामध्यस्थच्छादको विधुः ।
प्रवेशस्तत् पुरस्तेषां प्रायः पश्चाद् विनिर्गमः । ८९ ।
मंगल आदि सभी तारा ग्रहों का चन्द्रमाही छादक है क्योंकि वह पृथ्वी से
सबसे अधिक निकट है । (चन्द्रमा का अधिक गति से होने के कारण ) प्रायः
पूर्व दिशा में स्पर्श और पश्चिम दिशा में मोक्ष होगा ।
कृत्वैवायन् दृक् कर्म ग्रहाणो नति संस्कृतैः ।
विशिखै र्भयुतिः साध्या तद् ध्रुवेष्वनुसारतः । ९० ।
ग्रहों का आयान दृक् कर्म करने के बाद ही उनके नत द्वारा संस्कृत शर द्वारा
अश्विनी आदि नक्षत्रों के ध्रुव और शर आदि के अनुसार भगृह (नक्षत्र और ग्रह)
युति का साधन होगा ।
ख वृत्तान्त समासाख्यं वृत्तं संलिख्य पूर्ववत् ।
तन्मध्येऽत्र विधो र्बिम्बं ख वृत्ते वलनं तथा । ९१ ।
ग्रहण के परिलेख की तरह ख गोल वृत्त में चन्द्र और अन्य ग्रहों का मानैक्य
वृत्त खींचेंगे । और उसी केन्द्र से चन्द्रमा का बिम्ब बनायेंगे । ख वृत्त के वलन
के लिये -
स्पर्शोस्व दिशि मोक्षेऽन्यदिशिन्यस्यततो गुणः ।
आचन्द्र मध्यं प्रसृतो दिक् सूत्र मिति सम्मितः । ९२ ।
पूर्वविन्दु से अपनी दिशा में स्पार्शिक वलन देकर उसकी विपरीत दिशा में
पश्चिम बिन्दु से मौक्षिक वलन होंगे । वलनाग्र से चन्द्र बिम्ब मध्य तक जो रेखा
(सूत्र) होगा उसे दिक् सूत्र कहते हैं ।
तत्पार्श्वयोः स्वदिग् बाणः प्रसार्यः स्वेष्ट कालिकः
समासेऽग्र युतिर्यत्त ततः शीतांशु मध्यगम् । ९३ ।
यह दिक् सूत्र मानैक्यार्द्ध वृत्त को जिन दो स्थानों पर काटता है वहां से स्पर्श
और मोक्ष कालिक स्फुट शर अपनी अपनी दिशा में (उत्तर या दक्षिण की तरफ)
होंगे ।
सूत्रं यत्र स्पृशेत् नेमिं तस्यात्र स्पर्श निर्गमौ
ज्ञेयौ ग्रहाणां भाताञ्च गोल वेदि भिरश्रमत् । ९४ ।
मानैक्यार्द्ध के शराग्र विन्दुओं से चन्द्र बिम्ब के मध्य तक रेखा चन्द्र बिम्ब
परिधि को जिन स्थानों पर काटती है वहीं से ग्रह या नक्षत्र का निर्गम और प्रवेश
समझेंगे ।