सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रह युति वर्णनम् १८३
(अत्र स्फुट गति पदेन चन्द्र प्रथम गति गृह्यते, सूर्य ग्रहणे तथोक्तः) इस मध्यम
लम्बन को चन्द्र और मार्गी ग्रह के मध्यम गति अन्तर से गुणा कर चन्द्र की स्फुट
गति और ग्रह की स्फुट गति अन्तर से भाग देंगे । ग्रह वक्री होने पर मध्यम गति
योग से गुणा कर स्फुट गति योग से भाग देंगे ।
त्रिभोन लग्न प्राक् प्रत्यक् स्थिते चन्द्रे स्वकालतः
हीना युता स्तु तत्काल दृग् गतिघ्नास्तु आद्यया । ८३ ।
इस फल को त्रिभोन (तीन राशि घटाकर) लग्न से अधिक चन्द्र रहने पर
उसमें घटायेंगे । त्रिभोन लग्न से चन्द्र कम रहने पर उसमें यह फल जोड़ेंगे । चन्द्र
और त्रिभोन लग्न का समय समान हो जायेगा ।
दृग् गत्याप्ताः स्फुटा द्येतैः संस्कृतः समलिप्त योः
चन्द्रान्य ग्रहयोः कालो युति मध्ये स्फुटो भवेत् । ८४ ।
पुनः उस मध्य लम्बन असु को लम्बन संस्कृत समलिप्तीकरण (वित्रिभ लग्न
और चन्द्रमा का) काल के वित्रिभ शंकु से गुणा कर प्रथम वित्रिभ शंकु से भाग
देने पर फल स्फुट लम्बन असु होगा । इस असु द्वारा समलिप्ती करण के चन्द्रमा
और अन्य ग्रह के समय का संस्कार करने से स्फुट युति मध्यकाल होगा ।
तत्काल वित्रिभ तनो दृक् क्षेपः प्राग् वदागतः
स्वविश्वशराः (५१३) भागाढ्य क्ष्मांगा (६१) म्शो ऽवनतिर्विधोः । ८५ ।
सूर्य ग्रहण की विधि से युति मध्यकाल के वित्रिभ लग्न का दृक्क्षेप निकाल
कर उसमें उसका १/५१३ भाग जोड़ते हैं तथा योग को ६१ से भाग देने पर चन्द्र
की नति आती है ।
वित्रि भयोन् लग्नस्य याम्य सौम्य नतिक्रमात्
शराक्षानुसृतेः सिद्धा या नति स्तत् परिस्कृतौ । ८६ ।
सूर्य ग्रहण विधि से वित्रिभ लग्न की सौम्य याम्य नति क्रम से शर और
अक्षांश वलन द्वारा ग्रहों की नति सिद्ध होगी उससे
चन्द्रस्य च कुजादेश्व शरों चे देक दिग् भवो
तदा तद् वियुतेः शेषो दिक् शरश्चन्द्र तो ग्रहौ । ८७ ।
चन्द्र और भौमादि ग्रहों का शर संस्कार होगा । अर्थात् चन्द्र और उससे युत
ग्रह का शर एक दिशा में होने पर उनका अन्तर और भिन्न दिशा में होने पर योग
होगा ।
याम्य सौम्य स्थिते याम्य सौम्या रूया च्छेदकाय सः
तौ चेद्भिन्न दिशौतत् तत् संयोगादि शरः स्फुटः । ८८ ।
यह समागम परलेख के लिए उपयोगी शर होगा । चन्द्र से दक्षिण ग्रह रहने