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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१८२ सिद्धान्त दर्पण
निकालते हैं ।
तारा और चन्द्र का समागम गम काल -
सूक्ष्म चन्द्रस्य समता यत्र काल कुजा दिना लम्बनायत
दो चन्द्र मध्यभुक्ति (७९०/३५) मंनु (१४) हृता (५६/२८) । ७७ ।
जिस समय मंगल आदि तारा ग्रहों का चन्द्रमा के साथ राशि अंश और
कला समान हो उस समय का लम्बन जानने के लिए चन्द्र की मध्यम गति
(७९०/३५) को १४ से भाग देंगे । लब्धि (५६/२८) को
कुजादि पर नत्यूना षष्टिघ्नी विकलान्विता
मध्येन्द्व वक्रतत् खेट गत्यन्तर विभाजिता । ७८ ।
मंगल आदि ग्रहों की परम नति से निकाले परम लम्बन से घटायेंगे । यह
चन्द्र और उस ग्रह की नति अन्तर का परम मान होगा ।
परमनति अन्तर को दो स्थानों में रखकर एक स्थान पर ६० से गुणा कर दूसरे
स्थान पर की (परमनति) विकला जोड़ेंगे । उसमें चन्द्र और मार्गी ग्रह की मध्यम
गति अन्तर से भाग देंगे ।
ग्रह वक्रणि मध्ये न्दु तद् गत्यो र्योग भाजिता
लब्ध नाड्यादि तत्काल दृग् गतिघ्नं त्रिभज्यया । ७९ ।
ग्रह वक्री होने पर चन्द्र और वक्री ग्रह की मध्यम गति के योग से भाग
देंगे । इस परम लम्बन के नाड़ी आदि फल को उस काल की दृग्गति (वित्रिभ
शंकु) से गुणा कर त्रिज्या (३४३८) से
भक्तं तत्प्राण तो जीवा परः स्यात् चन्द्र लग्नयोः
अन्तराद् भुज को टिज्ये साध्ये दोर्ज्या परान्तररात् । ८० ।
भाग देकर लब्ध का असु बनायेंगे । और उसकी ज्या निकालेंगे । इसका
नाम पर होगा ।
लग्न और चन्द्र का अन्तर कर उसकी भुजज्या और कोटिज्या निकालेंगे ।
भुजज्या और 'पर' के अन्तर का
स्वघ्नात् कोटि वर्ग युतात् श्रुति मूलं पराहता
कोटीः श्रुति हता लब्ध धनुः प्राणा हि मध्यमाः । ८१ ।
वर्ग कर उसमें कोटिज्या का वर्ग जोड़कर उसका मूल निकालेंगे । फल
छाया कर्ण होगा । कोटिज्या को पर से गुणा कर छाया कर्ण से भाग देने पर फल
का चाप मध्यम लम्बन होगा ।
चन्द्र र्जु ग्रहयो र्मध्य गत्यन्तर हताहताः
स्फुट गत्यन्तरेणात्र गतियुत्यान्वृजौ पुनः । ८२ ।