सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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कुदाजीनां बिम्ब मानं वृत्ताख्यं भास्वरञ्च तत्
मध्यं स्फुट मिति द्वेधा दृग् बिम्ब मिति पञ्चधा । ३८ ।
मंगल आदि पांच तारा ग्रहों का पांच प्रकार का बिम्ब होता है- मध्य वृत्त
बिम्ब, मध्य स्वर बिम्ब, स्फुट वृत्त बिम्ब, स्फुट भास्वर बिम्ब और दृक् तुल्य
बिम्ब ।
तें जोमयः सूर्य बिम्बस्तद् प्रभा ग्रहणाद् ग्रहाः
चन्द्रादयो जल मया दृश्यन्ते विविधा जनैः । ३९ ।
सूर्य बिम्ब तेजस्वी है । उससे तेज (प्रकाश) लेकर चन्द्र आदि ग्रह जल के
समान विविध प्रकार का प्रकाश देते हैं ।
तारा ग्रहा विदूरत्वा दित्यच्छत्वाद् विधो रपि
चन्द्रवत् शृंगशो नात्र लक्ष्यन्ते लोक लोचनैः । ४० ।
मंगल आदि ग्रह भी चन्द्र के समान श्रृंगी होते हैं । ( सूर्य से उनके कोण
के कारण ) लेकिन चन्द्रमा की तुलना में उनकी अधिक दूरी के कारण उनके
शृंग नहीं दीखते (वे बिन्दु मात्र दीखते हैं) ।
खार्थवेदाः (४५०) म) खरामांकाः (९३०) पूर्णार्थगिरिसिन्धवः (४७५०-गु)
खाभ्रषड् बाहवः (१६०० शु) खाभ्रेष्वग्नया (३५०० श) योजनात्मकाः ।४१।
मंगल (४५०) बुध (९३०) गुरु (४७५०) शुक्र (२६००) शनि (३५००)
बिम्बव्यासाः कुजादी नां विश्वाकृति (२२१३) विभाजिताः,
फलं कलादि तन्मानं रविकक्षागतं भवेत् । ४२ ।
यह मंगल आदि पांच ग्रहों के योजनात्मक बिम्ब व्यास हैं । इन्हें २२१३ से
भाग देने पर रवि कक्षा में ग्रहों का कलात्मक बिम्ब मान आता है ।
ज्ञ शुक्रयो स्त्वेवस्या न्मध्य व्यासोऽपरस्यतु ।
त्रयस्य शीघ्र परिधिक्षुण्णं तद् भांश (३६०) भाजितम् । ४३ ।
बुध और शुक्र का जो कलात्मक बिम्ब मान (रविकक्षा में) है वही उनका
मध्य वृत्त व्यास हैं । अन्य तीन ग्रह के कलात्मक बिम्ब मान (रवि कक्षा में) का
अपनी अपनी शीघ्र परिधि से गुणा कर ३६० से भाग देने पर ।
वृत्त बिम्बं भवेन्मध्यं तद् विलिप्ताः कुजादितः
नागा (८) स्तत्वानि (२५) तत्त्वानि (२५)
पूर्णशैला (७०) दिशा (१०) क्रमात् । ४४ ।
ग्रहों का मध्य बिम्ब होगा । मंगल आदि ग्रहों का विकलात्मक बिम्ब मान
इस प्रकार है- मंगल (२५ ) गुरु (२५), शुक्र (७०) शनि (७०) ।