सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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सभी स्थिति में शर कर्ण होगा ।
प्राग्वत्पातोेन खेटज्या मध्यविक्षेप ताड़िता
शर श्रुति हता लब्धं त्रिज्याघ्नान्तश्रवो हृतम् । २५ ।
पूर्वोक्त विधि से ग्रह से पात की घटाकर विक्षेप केन्द्र ज्या निकालेंगे । उसको
मध्यम शर से गुणा कर शर कर्ण से भाग देंगे । लब्धि को त्रिज्या से गुणा कर
चतुर्थ शीघ्र कर्ण से भाग देंगे ।
भौमादि स्फुट विक्षेपः स्यात्सूक्ष्मः कलिकात्मकः
भौमज्ञान्य ग्रहाणां वा स्थूलो ग्राह्यो ऽल्प भेदतः । २६ ।
फल मंगल आदि ग्रहों का स्फुट शर (कला में) होगा । आरम्भ में कहा गया
स्थूल स्फुट शर भी इस काम में लगाया जा सकता है । क्योंकि कि सूक्ष्म से
बहुत कम अन्तर होता है ।
चलांश संस्कृतानां या ग्रहाणां सन्निवेश्म नाम्
क्रान्तिज्या सा स्फुतेषुघ्नी त द्युज्याप्ताप्त लिप्तिकाः । २७ ।
ग्रह का अयनांश संस्कार कर उसमें ३ राशि (९०