सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 270, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंदिशा के बारे में कहा गया है ।
कलात्म को मन्द करणः साध्य प्राग् वत् तृतीयकः
तत् त्रिज्यन्तर म भ्यस्तं बिभजा तूर्य कर्णयोः । १८ ।
मंगल आदि ग्रहों का तृतीय मन्द कर्ण पहले दी गयी विधि से निकाल कर
त्रिज्या और तृतीय मन्द कर्ण के अन्तर को त्रिज्या और चतुर्थ शीघ्र कर्ण के अन्तर
से गुणा करते हैं ।
विवरेण त्रिजीवाप्तां क्षेप कर्णान्तरं भवेत्
त्रिज्याधिकेन्त्ये श्रवणे यदि त्रिगुणतो (३४३८) धिकः । १९ ।
फल को त्रिज्या से भाग देने पर जो फल आयेगा उसको क्षेप कर्णान्तर कहते
हैं । चतुर्थ शीघ्र कर्ण त्रिज्या से अधिक हो-उसी के साथ मन्द कर्ण भी त्रिज्या
से अधिक हो तो
मन्द कर्ण स्तदा त्रिज्या क्षेप कर्णान्तरो न्विता
यद्यल्प स्त्रिगुणान मन्द कर्णस्थ त्रिभमौर्विका । २० ।
त्रिज्या से क्षेपकर्णान्तर को घटायेंगे । मन्द कर्ण त्रिज्या से कम होने से त्रिज्या
में
क्षेप कर्णान्तराढ्यास्यात् कर्म योग्या शर श्रुतिः
त्रिज्याल्पे तूर्य कर्णेतु मन्द कर्णौ यदाधिकः । २१ ।
क्षेप कर्णान्तर जोड़ेंगे । फल शर कर्ण कहा जाता है । चतुर्थ शीघ्रकर्ण त्रिज्या
से कम होने पर जब मन्द कर्ण त्रिज्या से अधिक है-
त्रिगुणात् तत् कुजेज्यार्किंक्षेप कर्णान्तरान्विता
त्रिज्या यज्ञशित क्षेप कर्णान्तर समन्विता । २२ ।
तब मंगल, गुरु और शनि का क्षेप कर्णान्तर (त्रिज्या में) जोड़ेंगे । बुध और
शुक्र का क्षेप कर्णान्तर का योग -
मन्द श्रुति र्थोन श्चेत् त्रिज्यातो मन्द कर्णकः
तथा कुजेज्य शौरीणां क्षेप कर्णान्त प्रोज्झिता । २३ ।
त्रिज्या के बदले मन्द कर्ण में जोड़ेंगे । चतुर्थ शीघ्र कर्ण त्रिज्या से कम होने
पर यदि मन्द कर्ण भी त्रिज्या से कम हो तो त्रिज्या से मंगल गुरु और शनि का
क्षेप कर्णान्तर घटायेंगे ।
त्रिज्याङ्गदैत्यगुर्वो स्तु तत्कर्णान्तर वर्जिता
मृदुश्रुति र्भवेत्कर्म योग्य सैव शर श्रुतिः । २४ ।
(चतुर्थ शीघ्र कर्ण और मन्दकर्ण दोनों लिमा से कम होने से शुक्र का क्षेप
कर्णान्तर उनके मन्द केन्द्र से घटाया जायेगा । इसी प्रकार इन ५ तारा ग्रहों का