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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१६४ सिद्धान्त दर्पण
सुसाधितायां भुवि विन्दु मेकं दत्वा ततः कर्कटकेन लेख्यम् ।
धृत्यंशं समार्थ (५७।१८) मितांगुलेन वृत्तं स्वसंज्ञं वलनाश्रितं तत् । ६ ।
जल के समान समतल भूमि पर किसी केन्द्र बिन्दु से (५७।१८) अंगुल
व्यासाद्धे के कर्कटक (कम्पास) से एक वृत्त बनायें । इस वृत्त का नाम खगोल
वृत्त जिसमें दो वलन (झुकाव) होंगे ।
मानैक्य खण्ड प्रमितेन मध्ये स्पर्शाय मोक्षा य च वृत्त मन्यत् ।
लेख्यं समासोरूय मिदं तदन्त र्ग्राह्यार्द्ध मानेनतदीय बिम्बम् । ७ ।
इस वृत्त के केन्द्र से ही पुनः मानैक्यार्द्ध के बराबर व्यासाद्धे का एक और
वृत्त बनायेंगे जिसका नाम समास वृत्त होगा । उसके केवल ग्राह्य विम्ब व्यासाद्धे
का ग्राह्य वृत्त बनायें ।
प्राग्वद् दिशा साधन मत्र कृत्वा दिक् चिह्न वत् कार्य मिव स्ववृत्तम् ।
प्राक् प्रत्य गङ्गाद् वलनं निधेयं तत्रांश संख्याङ्‌गुलकान् तरेण । ८ ।
त्रिप्रश्नाधिकार की विधि से खगोल वृत्त में और पूर्व और पश्चिम वृत्त के
पूर्व और पश्चिम बिन्दु से वलनांश) के बराबर (अंगुल) का न्यास (चाप काटते
करते हैं) ।
स्पर्शः विधो रुत्तर याम्य संज्ञं न्यस्यं स्वदिश्येव रवेश्च मोक्षे ।
मोक्षे विधोः स्पर्श इनस्य तञ्च व्यस्तं ततः सूत्रमपि प्रसार्यम् । ९ ।
अर्थात् पूर्व बिन्दु से चन्द्रग्रहण के स्पर्श का या सूर्य ग्रहण के मोक्ष काल के
वलन को अपनी अपनी दिशा में न्यास करते हैं ।
(उत्तर वलन के लिए उत्तर दिशा में और दक्षिण वलन के लिए दक्षिण दिशा
में चाप काटते हैं । चन्द्र ग्रहण का स्पर्श तथा ग्रहण का मोक्ष उनके बिम्ब के
पूर्व से होता है ) इसी प्रकार पश्चिम विन्दु से ग्रहण के मोक्ष या सूर्य ग्रहण के
स्पर्श काल के, वलन का अपनी दिशा में न्यास करते हैं ।
आमध्य विन्द्वत्र समास वृत्त मध्येऽपि दिक् सूत्रमितीद मिष्टम् ।
तद् याम्य सौम्या रूय दिशो प्रसार्यः सूत्रात्तथा ज्याक्रमतः कलम्बं । १० ।
वलन देने के बाद वलन के अग्रविन्दु से केन्द्र बिन्दु तक रेखा खींचेंगे ।
मानैक्यार्द्ध (समास) वृत्त पर भी ख वृत्त की तरह पूर्व पश्चिम, उत्तर दक्षिण विन्दु
न्यास करेंगे । इसमें पूर्व पश्चिम और उत्तर दक्षिण रेखा खींचेगे । उत्तर दिशा में
पूर्व या पश्चिम विन्दु को मिलाने वाली रेखा को वलनाग्र रेखा कहते हैं । वृत्त
को जिन दो बिन्दुओं पर काटती है वहां से उसका अपनी दिशा में न्यास करेंगे ।
यथा निजाग्रस्य समास वृत्ते स्पर्शा भवेतञ्चलना नुसारात् ।
शरः शलाकात्मक एषदेवः शीतद्युतेः स्पर्श निमील्योः प्राक् । ११ ।
दोनों वलनों के अग्र भाग को मिलाने वाली रेखा समासवृत्त को जिन दो