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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 260, कुल 609 में से

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पृष्ठ 260

दशमः प्रकाशः
परिलेख वर्णनम्
स्पर्शस्य मोक्षस्य च मध्यमस्य काष्ठावग त्यै परिलेख संज्ञम्
वरादम्यथच्छेदक मर्क चन्द्र ग्रहद्वयं येन भवेत्समक्षम् । १ ।
सूर्य और चन्द्र ग्रहण में स्पर्श, मोक्ष तथा मध्यम कब और किस दिशा में
होगा, इस संशय को दूर कर चित्र से स्पष्ट करने वाले परिलेख का वर्णन करता
है ।
दृशोर्बलम् तिर्यगधः स्थिते स्याद् द्रव्येयथानैव तथोर्ध्व संस्थे
सर्वततश्चन्द्र रवीषुमान साम्येऽपि मध्ये गगनं तनुत्वम् । २ ।
पानी में (या किसी द्रव्य में) तिरछे रखे वस्तु पर दृष्टि का बल होता है ।
(या दृष्टि का वलन-मुड़ना होता है) वैसा सीधा नीचे की दिशा (उर्ध्व) में नहीं
होता है । इसी प्रकार आकाश में सब जगह रवि चन्द्र और उनका शर एक होने
पर भी वह मध्य गगन (ऊपर दिशा) में छोटा दिखता है ।
विलोक्यते च क्षितिजं महत्वं प्राक्सु रिभिस्तत्क्रमतोऽ स्थूलानि
सिद्धानि तत् तत्कलिका