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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१५४ सिद्धान्त दर्पण
चन्द्र ग्रहण अध्याय में लिखे गये नियम से रवि और चन्द्र का बिम्ब साधन
होगा । इस प्रकार प्राप्त चन्द्र बिम्बमान को सूक्ष्मतम कैसे किया जायेगा इस की
विधि बतायी जा रही है । यह पहले किसी आचार्य ने नहीं कहा है ।
कर्कादि नक्रादिक केन्द्रकोटिफलेन युक्तत्रिगुण (३४३८) स्वघातात्
मूलेन तद् दोः फल वर्गयुक्ताद् द्विघ्न त्रिजीवा (६८७६) वियुतान शेषः।४१।
चन्द्र का मन्दकेन्द्र कर्क आदि ६ राशि में रहने पर त्रिज्या से उसका कोटिफल
घटायेंगे, अन्यथा (मन्द केन्द्र मकर आदि ६ राशि में रहने पर) त्रिज्या और कोटिफल
को जोड़ेगे । फल के वर्ग को मन्दभुजफल के वर्ग में जोड़कर उसका मूल त्रिज्या
के दो गुणा से घटायेंगे ।
यस्तेन भक्ता त्रिगुणस्यवर्गात् फलं
हि लिप्तामय मन्द कर्णः
त्रिज्याघ्न मध्येन्दु कलात्मबिम्ब (१०७७२४)
स्तत्कर्ण भक्तः स्फुटमिन्दु मानम् । ४२ ।
शेष से त्रिज्या वर्ग में भाग देंगे, फल मन्द कर्ण की लिप्ता होगी । चन्द्र के
मध्य बिन्दु कला मान (३१।२०) को त्रिज्या (३४३८) से गुणा कर गुणनफल
(१०७७२४) में मन्दकर्ण से भाग देने पर चन्द्र का स्फुट बिम्बमान होगा ।
आनीय शंकु स्फुट पर्वकाल सूर्यस्य दृग्ज्याञ्च परेन्दु नत्या (५६।२८)
हीनस्य शंकोः कृतियुक्त दृग् ज्यावर्गात्पदं यत्तमसः सकर्णः । ४३ ।
स्फुट अमान्त काल निकाल कर उस समय के स्पष्ट रवि से पूर्व नियम के
अनुसार शंकु और दृग्ज्या निकालते हैं । चन्द्र का लम्बन (५६।२८) शंकु से घटाते
हैं । शेष का वर्ग और दृग्ज्या का वर्ग जोड़कर उसका मूल निकालने से वह तम
कर्ण (छाया कर्ण) होगा ।
स्फुटेन्दुमान त्रिगुणघ्न मेतत् कर्णोद्धतं स्यात्तमस प्रमाणम् ।
यद्वेन्दु षष्ठ्यंश विनिघ्न शंकु त्रिज्याप्तयुक्ते न्दुमितस्तमःस्यात् । ४४ ।
स्फुट चन्द्र बिम्ब को त्रिज्या से गुणा कर तम कर्ण से भाग देने पर सूर्य ग्रहण
में तमोमान या ग्राहक मान होगा । स्फुट चन्द्र बिम्ब मान का १/६० में स्फुट
पर्वकाल शंकु से गुणा कर त्रिज्या से भाग दे कर लब्धि को स्फुट चन्द्र बिम्ब
मान में जोड़ने से भी मध्य तमोमान होगा ।
किंवा दिनस्योन्नत दण्ड संख्या द्विघ्ना विलिप्तास्तमसि प्रदेया ।
स्पर्शे विमोक्षे त्विदमेव कर्म कार्य हि शंकौ सु बहुप्रयासात् । ४५ ।
शंकु आदि के द्वारा तमो बिम्ब आदि निकालने में बहुत परिश्रम के कारण
मैने इसकी एक सरल विधि भी निकाली है । स्फुट पर्वकाल में दिन की उन्नत
घटी को २ से गुणा कर उसे विकला मान कर स्फुट चन्द्र बिम्ब की कला आदि