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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 250

सूर्य ग्रहण वर्णनम् १५३
एकांशयोश्चन्द्र शरावनत्योर्योगः पुनः भिन्नदिशोवियोगात्
शेषोऽधिकांश स्फुट दृक् शरःस्याद् ग्रासादि बिन्दु ग्रह वद् विचिन्त्यः ।३४।
चन्द्र शर तथा स्फुट न ति का समान दिशा में होने पर योग तथा भिन्न दिशा
में होने पर अन्तर करने पर स्फुट शर होता है । जिसका मान अधिक होता है
उसी की दिशा में स्फुट होगा । उससे चन्द्र ग्रहण अध्याय में लिखे नियम के
अनुसार ग्रास तथा स्थिति अर्द्ध का साधन होगा ।
देशेक्वचित्सौम्य शरोधिकै श्वेदक्षा तदाक्षं प्रतिशोध्य बाणात्
शेषः शराक्षो भवतीह सौम्यः सौम्येऽपमे वित्रिभजे ततोऽल्पे । ३५ ।
चन्द्र का उत्तर शर अपने स्थान के आक्षांश से अधिक होने पर शर से अक्षांश
घटायेंगे । शेष को उत्तर शराक्ष कहा जायेगा । वित्रिभ की उत्तर क्रान्ति इस शराक्ष
से कम तथा
स्वाक्षाधिकेऽक्षं परिवर्ज्य तस्माच्छेषा शराक्षाट्य उदंगतः स्यात् ।
सौम्येऽपमे तत्र निपक्षतोऽल्पे तदक्ष लिप्ता विवराच्छराक्षः । ३६ ।
अक्षांश से अधिक रहने पर वित्रिभ की उत्तर क्रान्ति से अक्षांश घटाकर शेष
को शराक्ष में जोड़ने से उत्तर नत होता है । वित्रिभ की उत्तर क्रान्ति अक्षांश से
कम होने पर अक्षांश से यह क्रान्ति घटाकर शेष से शराक्ष
विशोधितो याम्य नतोऽवशेष सौम्यः शराक्षाद् विवरे विशुद्धे
याम्येऽपमे वित्रिभ लग्न जाते स्वाक्षान्वते सौम्य शराक्षतोऽल्पे । ३७ ।
घटाने से शेष दक्षिण नत होगा । शराक्ष से अन्तर घटाने पर उत्तरनत होगा ।
वित्रिभ की दक्षिण क्रान्ति में अक्षांश जोड़ने से वह यदि उत्तर शराक्ष से कम हो
शराक्षतः प्रोज्म्यतदक्षयोगं लिप्तादिकः साम्य नतोऽवशेष
भागल्पकाक्षेषु विशेष एष देशेषु दृश्यो हि कुशाग्रधोभिः । ३८ ।
तो क्रान्ति और अक्षांश के योग को शराक्ष से घटाते हैं । शेष कला आदि
उत्तर नत होगा । एक अंश से अधिक अक्षांश वाले स्थान से ये सब संस्कार
करने के लिए मेरा विद्वानों से अनुरोध है ।
अतः शराक्ष प्रति संस्कृतायाः क्रान्तेः सदा वित्रिभ लग्नजायाः ।
नतांश याम्योत्तर तानुसारा दृक् क्षेप मध्या नतयोऽ खिलास्युः । ३९ ।
अतः प्रायः सभी स्थानों में (विषुवत् वृत्त क्षेत्र को छोड़कर) शराक्ष संस्कृत
वित्रिभ क्रान्ति से नतांश साधन होगा । (उत्तर दक्षिण दिशा में) तथा दृक् क्षेप,
मध्य तथा नत आदि सभी निकलें ।
प्राग् वद्गवेर्मान मथेन्दु मानं साध्यं विधावस्ति कियान् विशेषः ।
सूक्ष्मं तमो मान मतः प्रवक्ष्ये दृक् सिद्धये यद् गदितं न पूर्वे । ४० ।