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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१४६ सिद्धान्त दर्पण
शृंग मोटा दिखता है । छोटे वृत्त में बड़े वृत्त से काटने के कारण ऐसा होता है ।
अकृत कृतक राहुं यस्तमस्त्वात् कुभारूपं
विशति शशिनितस्मिन् नागमैर्दीक्षितानाम् ।
वितरति मन्त्रसिद्धि यश्च सद् वैष्णवानां
सदिशतु कुशलं नः श्याम शैलावनीशः । ८७ ।
कृष्ण वर्ण होने के कारण पृथ्वी की छाया राहु के समान है जिसमें चन्द्र
प्रवेश करने के समय नीलाचल वैष्णवों और तान्त्रिकों को मन्त्र सिद्धि देते हैं, वे
हम लोगों का मंगल करें ।
इत्युत्कलो ज्वल नृपाल कुल प्रसूत
श्री चन्द्र शेखर कृते गणितेऽसिद्धे
सिद्धान्त दर्पण उपाहित बालबोधे
चन्द्र ग्रहोऽष्टम इतः सुभगः प्रकाशः । ८८ ।
इस प्रकार उड़ीसा के विख्यात राजकुल में उत्पन्न श्री चन्द्रशेखर द्वारा गणना
और फल में समानता तथा बच्चों की शिक्षा के लिए लिखे सिद्धान्त दर्पण में चन्द्र
ग्रहण के विस्तृत विवरण सहित आठवां अध्याय समाप्त हुआ ।