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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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चन्द्र ग्रहण वर्णनम् १४५
(६३, २००) शशि मध्य कर्ण (४८७०५) गुणितः
(३०७,८१,५६,०००) स्पष्टार्क कर्णोद्धृतः
लब्धो नाक्षिति विस्तृतिः शशभृतः कक्षागतक्ष्माप्रभा
मानं स्या त्रिगुणा (३४३८) हतं स्फुट शशिश्रुत्याप्त मेतत्कलाः । ८३ ।
अब भूभा गणना की विधि दी जाती है । सूर्य बिम्ब व्यास से उसका १/१०
घटाकर (७२,०००-७,२०० = ६४,८००) उससे भूव्यास (१६०० घटाते हैं )
(६४,८००-१,६०० = ६३,२००) इसको मध्यम चन्द्र कर्ण (४८,७०५) से गुणा कर
(३,०७,८१,५६,०००) स्पष्ट सूर्य कर्ण से भाग देते हैं । फल को पृथ्वी व्यास से
घटाकर चन्द्र कक्षा में पृथ्वी छाया का बिम्ब मान होगा । इसको त्रिज्या (३४३८)
से गुणा कर स्फुट चन्द्र कर्ण से भाग देने पर पृथ्वी छाया बिम्ब (चन्द्र कक्षा में)
का कला मान होगा ।
तमो बिम्ब व्यासेऽम्बरकृतः (४०) कलो ने स्फुरतियो-
ऽन्तरे वृत्तः सारः सघनतर उक्तोऽन्धतमसम् ।
शरेऽल्पे तस्यान्तः प्रविशति यदा शीत किरण
स्तदातिम्लानः स्यान्निविड़ तम घूमां वृत इव । ८४ ।
पृथ्वी का छाया बिम्ब मान निकाल कर उससे ४० कला घटाने पर पृथ्वी
छाया का अन्धतमस मान होगा । यह अत्यन्त काला है । शरकला बहुत कम
होने पर चन्द्र इस अन्धतमस में प्रवेश कर अविम्लान या अति काला दिखता है ।
ग्रस्तेऽल्पीयसि भाग के सितरुचो वर्णो नभः साम्यभा-
र्गल्पे धूम निभो दले कवलिते कृष्णोऽर्द्ध भागधिके
रक्त श्याम रुचि र्भवेच्च सकल ग्रासक्षणे पाटलो ।
भू भा मध्यगतस्य पिङ्गल रुचि र्भानोः सदैवासितः । ८५ ।
अति अल्प चन्द्र ग्रहण होने से ग्रस्त आकाश नीला पड़ जाता है । अर्द्ध
ग्रहण में काला दिखता है । आधा से अधिक ग्रहण में लाला काला दिखता है ।
पूर्ण चन्द्र ग्रहण में ग्रस्त अंश पाटल पड़ जाता है । पृथ्वी छाया के बीच में चन्द्र
रहने पर उसका रंग पीला हो जाता है । सूर्य ग्रहण में यह सब नहीं होकर हर
समय ग्रस्त अंश (चन्द्रमा) काला दिखता है ।
क्षुद्रक्षपाकर त्वनुः क्षयितार्द्ध बिम्बो
भानुर्भवेन्निशित शृंग युगोऽतिनिम्नः
चन्द्रोऽर्द्ध खण्डित तनु स्तमसो महत्वा
दीषद् गभीर इव कुण्ठित शृंग युग्मः । ८६ ।
सूर्य बिम्ब की तुलना में चन्द्र बिम्ब हमेशा छोटा होता है । अतः सूर्य ग्रहण
के अर्द्धग्रास के समय सूर्य शृंग तीक्ष्ण होता है । पर चन्द्र ग्रहण में चन्द्र बिम्ब की
तुलना में पृथ्वी छाया का बिम्ब बड़ा होता है । अतः चन्द्र के अर्द्ध ग्रास के समय