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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 609 में से

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पृष्ठ 239

[१४२] [सिद्धान्त दर्पण]

और नत अंश द्वारा क्रमश आयन और अक्ष वलन करना चाहिये ।
अष्टादशांगुल गुण प्रमणेन वृत्त द्वन्द्वं
पुरन्दर जलेश दिशोर्विलिख्य
अन्याऽन्य लग्नमनतोन्नत भूप्रदेशे
तत्केन्द्रयोः प्रतिदिशंञ्च दिशैव बिन्दून । ७० ।
परिलेख लिखने के स्थान को समतल (जल के समान) कर उसमें एक वृत्त
(१८ अंगुल व्यासार्द्ध का) बना कर वृत्त परिधि में दिशा ज्ञान विधि से दो बिन्दु
देते हैं । (पूर्व और पश्चिम) इन बिंदुओं से १८ अंगुल व्यासार्द्ध का परस्पर सटे
हुए दो वृत्त खींचते हैं । इन दोनों वृत्तों के प्रति दिशा और कोण का विन्दु देते
हैं ।
मध्ये पुरः पर गतां निद धीत रेखां
प्राङ् मण्डलात् बहिरुदग् दिशि चांगुलान्ते
बिन्दून्तथा वरुण दिग्गत मण्डलस्य बाह्येऽ
ङ्गुलान्तरित दक्षिण भाग केऽन्यम् । ७१ ।
दोनों वृत्तों के केन्द्र से होकर पूर्वा पर (पूर्व पश्चिम) रेखा खींचते हैं । पूर्व
बिन्दु केन्द्र से खींचे गये वृत्त के उत्तर बिन्दु से और उत्तर एक अंगुल की दूरी पर
एक बिन्दु तथा पश्चिमी वृत्त के दक्षिण बिन्दु से १ अंगुल दक्षिण एक बिन्दु देते
हैं ।
बाह्यस्थ दक्षिण गविन्दुत एव पश्चात्
पुरश्चरम बिन्दुग कोटि युग्मम् ।
षष्ठांश संयुत रसाक्षि (१६।१०) मितांगुलेन
सूत्रेण चाप मथ पूर्वग बिम्बमध्ये । ७२ ।
ग्रह बिम्ब पश्चिम कपाल में रहने पर दक्षिण बिन्दु से १६।१० अंगुल व्यासार्द्ध
का पश्चिम वृत्त में तथा पूर्व कपाल में रहने पर पूर्व वृत्त के बाहर उत्तर बिन्दु से
१६।१० अंगुल का चाप पश्चिम वृत्त में खींचतेहैं ।
तद् वद् वहि र्विलिखतोत्तर बिन्दुतो ऽपि चापं लिखेत्परपुरोगतविन्दुलग्नम्
चापद्वयं भवति सम्मिलितं कपाल-द्वन्द्व स्थिता पम पथप्रतिम द्वयान्तः । ७३।
इन दोनों चापों से पूर्व और पश्चिम कपाल में क्रान्तिवृत्त का आकार बनेगा ।
प्रत्यग् दिशो हरिदिगन्त मथार्क (१२)
संख्यैश्चिह्नः क्रियादिनिलयान्कलयेन्निजांशैः
तत्रार्द्ध खण्डिततनुं शशिनं निवेश्य
तच्छृंगयुग्म परिलग्न गुणेन भूयः । ७४ ।
दोनों चापों के मिलन के जो क्रान्ति वृत्त बनता है । उसमें पश्चिम से पूर्व १२