सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 235, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें:
स् + थ + ि = स्थि
त = त
त् + य = त्य
र् + ध = र्ध
Yes, it literally has an extra 'त': "स्थितत्यर्ध"!
And look at "सन्ताड़ित":
स + न् + त + ा + ड़/द? + ि + त
It has 'ड़' with a dot: "सन्ताड़ित" or "सन्ताडित"?
It looks like "सन्ताड़ित" (or सन्ताडित, in modern Hindi fonts ड़/ड). In Devanagari: "सन्ताड़ित".
Let's check Line 16:
"मध्य स्थितार्द्धेन हताः स्फुटाः स्युः षष्ट्या हताः कोटि कलारवेन्दोः । ५२ ।"
Look at "स्थितार्द्धेन":
स् + थ + ि + त + ा + र् + द्ध + े + न = स्थितार्द्धेन.
Yes!
"कलारवेन्दोः" - कला-रवेन्दोः.
Let's check Line 20:
"भुक्त्यन्तराप्ता फल नाड़िकाभिः स्थित्यर्द्धमूनं सद धीष्ट नाड्यः."
Wait, look at "सद धीष्ट":
स + द (sad) space ध + ी + ष + ् + ट (dhīṣṭa) -> "सद धीष्ट" or "यदभीष्ट"?
Wait!