सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 222, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकारः १२५
यत् प्रश्नोत्तर विस्तरेण गणितं दिग्देश कालास्मये
तद् व्याख्या सहितं यतोऽस्ति हि मयातत् प्रोज्झि वाग् गौरवात् । ९३ ।
भास्कराचार्य ने सिद्धान्त शिरोमणि में इस त्रिप्रश्नाधिकार में बहुत प्रकार से
भुज, कोटि, कर्ण द्वारा अनेक प्रकार की घटनाओं का वर्णन किया है तथा प्रश्नोत्तर
द्वारा अनेक सन्देहों का निराकरण किया है । यह सब वासना भाष्य सहित सिद्धान्त
शिरोमणि में रहने के कारण मैं इस ग्रन्थ में विस्तार भय से पुनः नहीं लिखा रहा
हूँ ।
सिद्धान्त्यचयादलम्भि मय कायो यो विशेषो दृशा
तुल्यस्तल्लिखितं मदिष्ट मिहतत् तत्सांगता सिद्धये
सर्वग्रन्थ कृति र्वभूव गणिते गोलान्विते हृद्गते
क्षेत्राणा मुपपत्तयो हि सुलभा स्तत् किं वचो विस्तरैः । ९४ ।
अन्य ग्रन्थों की तुलना में जिन विषयों पर मेरा स्वतन्त्र विचार है । और जिन
घटनाओं (ग्रह स्थिति) को मैंने अपनी आंखों से देखा है, इस प्रकार के अनेक
विषयों की इस ग्रन्थ में विशेष चर्चा की गयी हैं । हृदय में गोल तथा गणित का
दृढ़ ज्ञान होने से ग्रन्थ आसानी से समझा जा सकता है, और गणित आदि नियमों
की उपपत्ति (प्रमाण) कठिन नहीं होगी। अतः उपपत्ति आदि लिखकर ग्रन्थ का
कलेवर बढ़ाना मैंने आवश्यक नहीं समझा ।
यत्राष्टाब्धि कलाढ्य नन्दकु (१९।४८) लवेरक्षः समक्षीकृतौ
व्यक्षात् सार्ध रसैर्क्ष कैः (२७६।३०) ख खं भुजै (२००) भूमध्य रेखांकतः
सिद्धं योजनकैः स्वदेश विवरं तत्रासिता दौशल-
ल्लोलेला कमला विलास्यल मलं कुर्यान् मदीयं मनः । ९५ ।
उत्तर अक्षांश (१९।४८) अर्थात् विषुवत् रेखा से (२७६ १/२) योजन उत्तर
तथा भारतीय मध्य रेखा से (२००) योजन पूर्व देशान्तर पर स्थित नीलाचल पर्वत
(पुरी) में चञ्चल नेत्र और हास्य वाली लक्ष्मी जी के साथ क्रीड़ा करते हुए श्री
जगन्नाथ मेरा मनोरथ पूर्ण करें ।
इत्युत्कलो ज्वल नृपाल कुल प्रसूत
श्री चन्द्र शेखर कृते गणिते ऽक्षि सिद्धे
सिद्धान्त दर्पण उपाहित बाल बोधे
त्रिप्रश्नवान् मुनिमतः शमितः प्रकाशः । ९६ ।
इस प्रकार उड़ीसा के विख्यात राजकुल में उत्पन्न श्री चन्द्रशेखर द्वारा गणना
तथा दृश्य में समता के लिए तथा बालबोध के लिखे सिद्धान्त दर्पण में तीन प्रश्नों
के मुनिमत से विचार सहित सातवां प्रकाश समाप्त हुआ है ।