सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकारः ११७
उत्तर क्रान्ति की ज्या x पल कर्ण
सममण्डल शंकु = ----------------------------------------
पलभा
दृग्ज्या = √ त्रिज्या² - सममण्डल शंकु²
दृग् ज्या x १२
सममण्डल छाया = ------------------
सममण्डल शंकु
त्रिज्या x १२
सममण्डल कर्ण = ------------------
सममण्डल शंकु
सूर्य सिद्धान्ते -स शंकुः स्वाक्ष जीवाघ्नः
परक्रान्ति ज्या (१३७०) हृतः । इति ।
फलं छायार्क बाहुज्या तद् धनुर्भुज केन्द्रकम् । ५१ ।
सममण्डल शंकु x अक्षांश की ज्या
----------------------------------------- = सायन रविभुज ज्या
परम क्रान्ति की ज्या (१३७०)
ततः पूर्व वदानेयौ छायार्क स्फुट भास्करौ
अथोच्यते कोण शंकोः सिद्धयेऽग्रज्यकादिकम् । ५२ ।
सायन रवि भुजज्या से पहले की तरह चाप (कोण) निकाल कर स्पष्ट रवि*
(सायन) निकाला जा सकता है । अब कोण शंकु निकालने के लिए अग्रज्या
आदि के बारे में कहा जाता है । ( उत्तर दक्षिण से ४५° पूर्व या पश्चिम ४ बिन्दुओं
को कोण कहते हैं । कोण वृत्त २ होने पर भी ४ माने जाते हैं ।
सूर्य सिद्धान्ते-स्वक्रान्तिज्या त्रिजीवा (३४३८) घ्नी लम्ब ज्याप्ताग्रमौर्विका
स्वेष्ट कर्णहता भक्ति त्रिज्य याग्रांगुलात्मिका । ५३ । इति ।
क्रान्ति ज्या x त्रिज्या
मध्य अग्रा = -----------------------
लम्बज्या
मध्य अग्रा x इष्ट कर्ण
कर्ण वृत्ताग्रा = ------------------------
त्रिज्या
खमध्यात् कोण रेखास्थ सूर्यात् क्षितिज गामिनी
कोटिज्या कोण शंकुत्वेनोच्यते तद् विलोमगा । ५४ ।
ख मध्य (zenith) से क्षितिज के कोणीय बिन्दुओं के वृत्त (कोण वृत्त) पर*
जब सूर्य आता है तब सूर्य से क्षितिज वृत्त पर लम्ब को कोण शंकु कहते हैं ।
उस समय ख स्वस्तिक से रवि तक का कोण वृत्त का अंश सूर्य का नतांश या
क्षितिज से रवि तक का वृत्तांश उन्नतांश है । इस उन्नतांश की ज्या या नतांश
की कोटिज्या कोण शंकु का मान होता है ।
या विदिक् तत्र या छाया कोण छायेति सा मता
सौम्या पमे स्वाक्ष समे न स्यातां कोण शंकु मे । ५५ ।
सूर्य के विपरीत दिशा में १२ अंगुल शंकु की उस समय (सूर्य के कोणवृत्त