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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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११८ सिद्धान्त दर्पण
पर रहने के समय) जो छाया हो उसे कोण छाया कहते हैं। अपने (उत्तर) अक्षांश
के समान सूर्य की उत्तर क्रान्ति होने पर कोण शंकु की छाया नहीं होती ।
यदि मध्याह्न गो भानु र्दक्षिण स्यां ततस्तदा
कोण शंकु स्तदाग्नेयां नैऋत्यां प्राक् पराह्वयोः । ५६ ।
यदि मध्याह्न सूर्य दक्षिण नत होता है तो पूर्वाह्न कोण शंकु को आग्नेय (पूर्व
दक्षिण कोण) तथा अपराह्न कोण शंकु को नैऋत्य (पश्चिम दक्षिण कोण) शंकु
कहते हैं ।
स न तश्चेदुत्तरस्यां तदेशानमरुद्दिशाः ।
कोण शंकुप्रभाकर्णैः कोणारूयं साध्यता नतम् । ५७ ।
मध्याह्न सूर्य उत्तर नत होने पर पूर्वाह्न तथा अपराह्न के कोणों को क्रमशः
ईशान और वायव्य कोण शंकु कहा जाता है । यह जानने पर कोण वृत्तीय शंकु
की छाया और कर्ण की सहायता से कोण वृत्तीय नतांश निकाला जा सकता है ।
त्रिज्या वर्गाद्धंतो (५९,०९,९,९२२) ऽग्रज्या वर्गोनात् कृत वज्वभि (१४४)
निघ्ना वर्गदल (७२) युक् पलभा वर्ग भाजितात् । ५८ ।
त्रिज्यावर्ग के आधे से अग्रज्या वर्ग घटा कर शंकु (१२) के वर्ग से गुणा करें
तथा फल को शंकु (१२) वर्ग के आधे और पल भा वर्ग के योग से भाग दें ।
लब्धं तत्करणी नाम कर्म भूमौ निधायताम्
पुनर ग्रज्य कार्क (१२) घ्न विषुवच्छायाताड़िता । ५९ ।
प्राप्त लब्धि (फल) को करणी कहा जाता है । उसे अलग रखें पुनः अग्रज्या
को १२ और पल-भा से गुणा कर
द्व्यद्रयाप्ते (७२) द्ये नाक्षभा वर्गे णोद्धताक्ष फलं भवेत्
तद् वर्ग करणी योगात् मूलं अक्षफलो नयुक् । ६० ।
उसे पलभावर्ग और ७२ के भोग से भाग देते हैं । राशि को फल या अक्षफल
कहते हैं । अक्षफल का वर्ग करणी में जोड़कर उसका वर्गमूल निकालने पर जो
आता है उसे मूल कहते हैं । मूल को अक्षफल में जोड़ते या घटाते हैं ।
क्रमतः कोण शंकुः स्याद्दक्षिणोत्तर गोलयोः
सूर्यसिद्धान्ते-तत्रिज्या वर्ग विश्लेषान्मूलं दृग्ज्या भिधीयते । ६१ ।
यदि कोण शंकु उत्तर या दक्षिण गोल (पूर्वा पर रेखा से) में हो, (सूर्य सिद्धान्त
के अनुसार) त्रिज्या वर्ग से कोण शंकु का वर्ग घटाकर वर्गमूल निकालने से
दृग्ज्या ( कोणशंकुज्या ) आती है ।
सारांश - करणी = १२² (त्रिज्या²/२ - अग्रज्या²) / (१२²/२ + पलभा²)