सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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है । सूर्य की उत्तर क्रांति अक्षांश से कम या सूर्य दक्षिण गोलार्द्ध में रहने पर
छाया सममण्डल से उत्तर होती है ।
१. छाया सममण्डल (पूर्व पश्चिम रेखा) पर-सूर्य क्रान्ति अक्षांश के बराबर
२. छाया सममण्डल से दक्षिण-सूर्य क्रांति अक्षांश से अधिक । क्रान्ति और
अक्षांश दोनों उत्तर)
३. छाया सम मण्डल से उत्तर-सूर्य दक्षिण अक्षांश ।
लम्बज्या विषुवद् भघ्नी सौम्य क्रान्ति ज्योद् धृता
सममण्डल कर्णः स्यात् किं वाक्षज्यार्क (१२) ताड़िता । ४७ ।
सम मण्डलीय छाया कर्ण निकालने के लिए पलभा में लम्बज्या से गुणा
कर उत्तर क्रान्ति ज्या से भाग देते हैं । अथवा अक्षज्या में १२ से गुणा कर (अक्षांश
की ज्या) - - -
तत्क्रान्ति ज्योद् धृता किं वा दिनार्द्ध श्रवणा हता
अक्षप्रभा दिनार्द्धोग्रा हता कर्णः स एव हि । ४८ ।
उत्तर क्रान्ति की ज्या से भाग देते हैं । अथवा (सममण्डलीय छाया कर्ण
निकालने के लिए) पलभा में दिनार्द्ध (छाया सममण्डल में होने पर यह शंकु के
बराबर होगा ।) से गुणा कर दिनार्द्ध कालीन कर्ण-वृत्ताग्रा से भाग देते हैं । (दिनार्द्ध
कालीन छाया का अग्र विषुव छाया अग्र से जितना उत्तर या दक्षिण है उसे कर्ण
वृत्ताग्रा कहते हैं)
अक्ष कर्ण हृता सौम्य क्रान्ति ज्याक्ष प्रभो द् धृता
सममण्डल शंकुः स्यात् त्रिज्यावर्ग (११८१९८४४) जान्तरात् । ४९ ।
अक्षकर्ण (पल कर्ण) में उत्तर (सांम्य) क्रान्ति की ज्या से गुणा कर पल भा
(अक्षप्रभा) से भाग देने पर सममण्डल शंकु आता है । सममण्डल शंकु के वर्ग
को त्रिज्या वर्ग (१,१८,१९ ,८४४) से घटा कर
मूलं दृग् ज्या रविघ्ना सा शंकुभक्त भवेद् प्रभा
त्रिज्या सूर्य हतातेन (सममण्डल शंकुना) भक्ता प्रागु दिता श्रुताः ।५० ।
वर्गमूल निकालने पर दृग्ज्या निकलती है । दृग्ज्या में १२ से गुणा कर
(सममण्डल) शंकु से भाग देने पर सममण्डल छाया निकलती हैं । त्रिज्या में १२
से गुणा कर उससे ( सममण्डल शंकु से) भाग देने पर सममण्डल कर्ण होता
है ।
सारांश-सममण्डल छाया कर्ण = पलभा x लम्बज्या
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उत्तर क्रान्ति की ज्या
उत्तर अक्षांश की ज्या x १२ पल भा x दिनार्द्ध कर्ण
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उत्तर क्रान्ति की ज्या दिनार्द्ध कालीन कर्णवृत्ताग्रा