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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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११४ सिद्धान्त दर्पण
कोटिज्ज्या से भाग देने पर मध्याह्न की छाया तथा शंकु को त्रिज्या से गुणा कर
कोटिज्ज्या से भाग देने पर मध्याह्न का छाया कर्ण ज्ञात होगा।
उन्मण्डलस्य खेटस्य क्रान्त्योरुत्तर याम्ययोः
क्षितिजोर्ध्वाधर स्थानो भवत्युद् वृत्तजोतरः । ३५ ।
उन्मण्डल पूर्व पश्चिम और उत्तर दक्षिण आकाशीय ध्रुवों से जाता वृहत् वृत्त
है जो निरक्ष (विषुव रेखा) पर क्षितिज होता है। उन्मण्डल का उत्तरी भाग उत्तरी
गोलार्द्ध (जैसे भारत) के क्षितिज वृत्त के ऊपर रहता है। उन्मण्डल के शंकु
(विषुवत वृत्त पर शंकु) दक्षिण क्रान्ति होने पर ऊपरी भाग में रहता है। (ग्रह की
स्थिति से उन्मण्डल पर लम्ब की लम्बाई को उन्मण्डल शंकु कहते हैं।
विषुवद् भापमज्याघ्नी कर्णा मोद् वृत्तना भवेत्
त्रिज्योन्मण्डल शंकुघ्नी चरज्या सच यष्टिका । ३६ ।
पलभा x क्रान्तिज्या
---------------- = उन्मण्डल शंकु ।
पलकर्ण
उन्मण्डल शंकु x त्रिज्या
--------------------- = यष्टि (भूकेन्द्र से ध्रुव की दिशा में
चरज्या पलभा की लम्बाई)
यष्टि रुद् वृत्त शंक्वाढ्या तदूनोत्तर याम्ययोः
गोलयो क्रमशः शंकुर्भवति स्वदिनार्द्धजः । ३७ ।
उत्तर या दक्षिण गोल में इस यष्टि में उन्मण्डल में जोड़ने या घटाने से मध्याह्न
शंकु अपने स्थान का होता है।
अथवा वक्षमाणान्त्य गुणितोद् वृत्त शंकुना
चरज्याप्ता भवेत् शंकु रुदग् दक्षिण काष्ठयोः । ३८ ।
अथवा अन्त्या (बाद में कही गयी) को उनमण्डल शंकु से गुणा कर चरज्या
से भाग देने पर मध्याह्न शंकु का मान निकलता है।
सूर्य सिद्धान्ते-नतांश भुज् कोटिज्ये दृग्ज्या शंकुज्यके मते ।
क्रान्तिज्या विषुवत् कर्ण हताप्ता शंकुजीवया । इति । ३९ ।
नतांश की ज्या और कोटिज्ज्या को क्रमशः दृग्ज्या तथा शंकुज्या कहते हैं।
क्रान्तिज्या को विषुवत छाया कर्ण (पल कर्ण) से गुणा कर शंकु (१२) से भाग
देने पर -
अग्रा माध्याह्निकी सैव सौम्य याम्या पमानुगा
स्वेष्ट कर्ण हता मध्यकर्णाप्ता ग्रिष्ट कालिकाः । ४० ।
मध्याह्न अग्रा होती है। क्रान्ति की दिशा के अनुसार यह दक्षिण या उत्तर
होती है। (दक्षिण क्रान्ति का दक्षिण के अनुसार मध्यान्ह अग्रा) मध्याग्रा को इष्ट