सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंत्रिप्रश्नाधिकारः १०९
संख्या से भाग दें । फल कला आदि होगा ।
यदि प्रथम शेष मूल के समान या उससे अधिक हो तो उसे २ से गुणा कर
१ दण्ड जोड़े । इसको मूल के ४ गुणा में ३ जोड़ने से प्राप्त संख्या से भाग देने
पर कला आदि मूल होगा ।
पूर्व मूल और यह मूल मिलकर पूरा मूल होगा । इस प्रकार सभी अवयव
का मूल निकाला जायेगा ।
आयुर्दाये गुणक कलिका मात्र भेदाज् द्वि सप्त (७२)-
त्यह्नां भेदो भवति यदतः सूक्ष्म कर्मात्र कार्यम्
रूपादीनां कुरुत नवभिः फालकै र्धातु मस्मा-
न्मूलं लिप्तादि च बिकलितात् पूर्ववत् शेष कर्मा । ९ ।
इस प्रणाली से आयुर्दाय निकालने के समय (फलित ज्योतिष में भोग्य नक्षत्र
काल से १२० वर्ष का अनुपात) गुणन में १ कला का भेद आने पर आयु में ७२
दिन का अन्तर होता है । अतः सावयत राशि का मूल बहुत सावधानी से निकालना
चाहिये । (यह स्थूल विधि है, और कुछ अशुद्धि रहती है । जिसे वर्ग निकालकर
जांच करना पड़ेगा)
येषां येषां गुणन वशतो मूल मानेतुमिष्टं
ते ते हस्तांगुल मुखमया ज्याकलाद्यात्मकावा
अंका ग्राह्याः कृति पदविधौ रूप लिप्ता विलिप्ता
रूपाद्यं स्याद् विकलित कृते मूलमाप्तं खषड्भिः । (६०) । १० ।
तीन तीन अवयव वाली दो राशियों का गुणन ९ स्थानों में होता है, गुणक
के प्रत्येक अवयव को ऊपर की तीनों अवयवों के साथ अलग अलग गुणाकर
छोटे अवयवों को एक एक स्थान दाहिने कर जोड़ते हैं । इस प्रकार प्रथम से
आरम्भ कर पांच अवयव हैं . जिसमें रूप (प्रथम), लिप्ता (६० वां भाग), विलिप्ता
(लिप्ता का ६० वाँ भाग) ग्रहण करते हैं । इनका पहले की भांति वर्गमूल निकालते
हैं । या सूक्ष्मविधि से रूप, कला, विकला इन तीन राशियों का विकला कर
उनका मूल निकालते हैं । मूल में ६० से भांग देने पर कला आदि मूल होगा ।
ऋज्वी वृत्ता समपृथुशिखा मध्यमूला नृयष्टि
दीर्घाल्पावां गुलमिति मतो द्वादशांशः किलास्याः
किंवा कालानयन विधये शंकुमात्मांग यष्टि
कृत्वा च्छायां कलयत पुरो वर्तिनीं पाद मध्यात् । ११ ।
शंकु का वृत्त आधार तथा ऊपर अग्र तक का भाग समतल और शीधा होगा ।
अग्र और मूल के बीच की दूरी तथा आधार वृत्त की परिधि समान् होगी । शंकु
का आकार कुछ भी हो सकता है पर उसकी ऊंचाई के १/१२ भाग को अंगुल
कहा जायेगा ।