सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 204, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंसप्तमः प्रकाशः
त्रिप्रश्नाधिकारः
शङ्कुच्छायादि वर्णनम्
दिग् देश काल कलानार्थ मथा भिधास्ये
त्रि प्रश्न नामक मकर्कश वाक्य चक्रम्
सर्वोपकारकतया प्रथितं प्रकाशं प्राह्नं
मुदोपकरणाख्य मति प्रवीणैः । १ ।
लोगों के आनन्द तथा उपकार के लिए इस त्रिप्रश्न नामक प्रकाश का आरम्भ
करता हूं जिससे दिग्, स्थान और समय का ज्ञान सरल भाषा में हो ।
दिग् (दिशा) का निर्णय
दिक् साधनार्थ मवनौ सुसमी कृतायां
तोयैर्विलिरूप चतुरक्षि (२४) मितांगुलेन
सूत्रेण मण्डल मनुष्य समस्य मध्ये सूर्या
(१२) ङ्गुलं सुसरलं निदधीत शंकुम् । २ ।
दिग् (दिशा) का निर्णय करने के लिए किसी स्थान को जल की सतह के
समान समतल कर उसे लीप पोंछ कर उस पर २४ अंगुल व्यासार्द्ध का एक वृत्त
खींचें । उसके केन्द्र बिन्दु पर १२ अंगुल ऊंचाई का एक शंकु रखें ।
तद् भाग्रमाविशति यत्र यतोनिरेति प्राक्
पश्चिम स्थिति इने किल तत्र विन्दु दत्वा
ततश्च शर बाहु समाङ्क लेन (२५) सूत्रेण
बिम्ब युगलं विदधीत धीमान् । ३ ।
शंकु की छाया वृत्त की परिधि को दो बार स्पर्श करेगी (जब छाया की
लम्बाई २४ अंगुल हो) दोनों बिन्दुओं पर चिन्ह देकर उन्हें एक रेखा से मिलायेंगे
तथा उन्हें केन्द्र मानकर २५ अंगुल सूत्र (व्यासार्द्ध) का एक-एक वृत्त खींचेंगी ।
या तत्परस्पर समाक्रममोत्थ रेखा
मत्स्याकृति र्भवति तन्मुख पुच्छ मार्गः ।
चिन्हं भवेद् यम कुबेर दिशोरि होज्झि
प्राग् विन्दु संस्कृत रुप क्रम जाल्प भेदात् । ४ ।
दोनों वृत्त एक दूसरे को दो बिन्दुओं पर काटेंगे तथा उनके बीच का क्षेत्र
मत्स्य की आकृति का होगा । मत्स्य आकृति के मुख और पुच्छ स्थान पर इन
दो बिन्दुओं को मिलाने पर उत्तर दक्षिण रेखा होगी । यह रेखा छाया की अग्रगति,
रेखा (परिधि के दोनों बिन्दुओं की रेखा) पर लम्ब होगी । प्रथम और द्वितीय छाया
बिन्दुओं के बीच के थोड़े समय में क्रांति गति बहुत कम होती है अतः उसे छोड़