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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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सूक्ष्म पञ्जिका क्रान्त्यादि वर्णनम् ९३
तुलाधरादि चक्रार्द्ध स्थिते पातेऽय नांशकाः ।
ऋणा खास्तत्र मेषादि भार्द्धस्थे धन संज्ञकाः । ८३ ।
क्रान्तिपात तुलादि ६ राशि में रहने से अयनांश को ऋण ( घटाना) तथा
मेषादि ६ राशि में रहने से धन (योग) किया जाता है ।
सूर्य सिद्धान्ते-तत्संस्कृताद् ग्रहात्क्रान्ति छायाचर दलादिकम् ।
स्फुटं दृक् तुल्यतां गच्छे दयने विषुवद्द्वयम् । इति । ८४ ।
सूर्य सिद्धान्त के अनुसार-अयनांश संस्कृत ग्रह से ही क्रान्ति छाया, चरखण्ड
आदि निकाला जाता है । क्रान्ति पात की गति को विषुवक्रान्ति (कर्क संक्रान्ति
या उत्तर अयन तथा मकर संक्रान्ति या दक्षिणायन) के समय प्रत्यक्ष देखा जा
सकता है ।
सप्तर्षीणामगस्त्यस्य तथा संयमनी पतेः
तत्तत्पार्श्वस्थ ताराणां क्रान्ति पातो न चालकः । ८५ ।
सप्तर्षि, अगस्त्य और यम तथा इनके अति निकट के तारा गण की क्रान्ति
पात के कारण कोई गति नहीं है ।
एतेषां भगणस्थानां स्वस्थानाद् यदि दृश्यते ।
प्राग् गतिश्चलितं चक्रं तत्पश्चादवधारयेत् । ८६ ।
इनकी गति नक्षत्र मण्डल के भीतर पूर्व की तरफ होने से समझना चाहिये
कि नक्षत्र चक्र पश्चिम कीतरफ घूम गया है ।
प्रत्यग् गतौ पूर्व चारं क्रान्तिं तदनुसारतः ।
क्रान्ति मार्गात् शरं भानां दिग् भेदं तद् वशाद् बुधः । ८७ ।
सप्तर्षि आदि को पश्चिम गति दीखने का अर्थ है । भचक्रकी पूर्वः गति हुई
है । इस धारणा के अनुसार ज्योतिर्विद नक्षत्रों की क्रान्ति वृत्त से शर या उत्तर
दक्षिण विक्षेप का निर्णय करते हैं ।
छायार्कात् साधिता दल्पे करणागत भास्वति
तदन्तर मिताभागाः प्राक् चलांशाः प्रकीर्त्तिताः । ८८ ।
छाया द्वारा निकाले गये सूर्य से गणित साधिन सूर्य के राशि आदि में जो
थोड़ा सा अन्तर रहता है उसे ही अयनांश समझना चाहिये । इस अयनांश की
गति भी पूर्व की तरफ है ।
करणा गत चण्डांशो रल्पोच्छायां विवस्वति
प्रत्यक् चलांश विज्ञेया स्तदन्तर मिताः स्फुटाः । ८९ ।
इसके विपरीत यदि गणित द्वारा निकाले सूर्य के अंश से छाया द्वारा निकाले
सूर्य का अंश कम है, उनका अन्तर पश्चिम गति वाला अयनांश है ।