सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें९४ सिद्धान्त दर्पण
किं वायन द्वयेभानो रेक क्रान्ति स्थिति र्यदा ।
तत्काल स्फुट योगार्द्ध मयनान्त गृहादिकम् । ९० ।
कर्क और मकर संक्रान्ति के समय (अर्थात् दोनों अयनों में ) जब दोनों समय
रवि की क्रान्ति समान होगी, दोनों समय के रवि की राशि आदि का योग कर
आधा करने पर अयनांश का परिमाण आयेगा ।
तस्य चायन संक्रान्ते रन्तरस्था श्रलांशकाः
प्राक् पश्चादयने क्रान्तेर्धनर्णाख्या क्रमादयः । ९१ ।
निरयन कर्क और मकर संक्रान्ति से पहले सायन कर्क और मकर संक्रान्ति
दीखने से अयनांश जोड़ा (धन) जायेगा अन्यथा घटाया जायेगा ।
प्राक् पश्चिमायतस्यैव ग्रह सञ्चार वर्त्मनः
पार्श्वयोर्वक्रता नाम क्रान्तिश्चापक्रमोऽपम् । ९२ ।
ग्रह कक्षा और विषुववृत्त दोनों पूर्व पश्चिम दिशा में फैले हैं तथा वे एक
दूसरे को आकाश में जहां काटते हैं उससे क्रान्ति होती है । अतः ग्रह से ग्रह
कक्षा के दक्षिण या उत्तर विषुववृत्त तक जो अन्तर (ध्रुव प्रोत वृत्त पर) है उसे
क्रान्ति कहते हैं । इसका अन्य नाम अपम या अपक्रम भी है ।
खगोले कल्प्यते रेखा क्रान्ति मार्ग भिधा हि या
वैलोम्यात् संस्कृते चक्रे चलांशैरादि मध्ययोः । ९३ ।
आकाश गोल में कल्पित रेखा जिसे क्रान्ति वृत्त या मार्ग कहा जाता है उसमें
बारह राशियां हैं । इनमें प्रथम और सप्तम राशि में अयन संस्कार करेंगे ।
सा न भो मध्यगा राशि त्रयान्ते सौम्यगा ततः ।
यावत् सार्द्ध त्रिपक्षांशा (२३।३०) नवभान्तेऽपि याम्यगा । ९४ ।
संस्कार के बाद मेष और तुला का जो स्थान होगा उससे ३ राशि पर (कर्क
और मकर) क्रान्ति और विषुववृत्त का दो सम्पात होगा । सम्पात से ३ राशि के
अन्तर पर क्रान्ति और विषुव वृत्त के बीच सर्वाधिक (परम) दूरी २३°।३०' होगी ।
क्रान्तिज्या परमातस्मात् खाद्रि विश्व (१३७०) कलोच्यते
चलांश संस्कृतानां या ग्रहाणां बाहु मौर्विका । ९५ ।
परम क्रान्ति (२३।३०) की ज्या (१३७०) होगी । चलांश संस्कार करने पर
ही ग्रहों का भुजफल और ज्या निकाला जाता है ।
परमापक्रम ज्या (१३७०) घ्नी सोद् धृता त्रिज्यया (३४३८) थवा
शत (१००) घ्नी चन्द्र तत्वा (२५१) प्ता क्रान्ति ज्या साभिधीयते । ९६ ।
स्पष्ट ग्रह में अयनांश जोड़कर उसकी भुजज्या में परम क्रान्ति की ज्या (१३७०)
से गुणा कर त्रिज्या (३४३८) से भाग देंगे अथवा (१००) से गुणा कर (२५१)से