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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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पृष्ठ 178

सूक्ष्म पञ्जिका क्रान्त्यादि वर्णनम् ८१
रवि का सूक्ष्म स्फुट निकलने के लिये सूक्ष्म सारणी और स्थूल स्फुट निकालने
के लिये स्थूल सारणी का व्यवहार करना चाहिये । इसका उलटा करने से अशुद्धी
होगी ।
चन्द्र की सूक्ष्म स्फुट गति
तुंगान्तर यत्फल मत्र सिंह त्रिज्या हतं तत्प्रथमेन्दु भान्वेः ।
विश्लेषदोर्ज्याप्तफलं तदीयान्तरोत्थ तदोत्थ कोटी गुण संगुणञ्च ॥ १७ ॥
सूक्ष्म तुंगान्तर फल को त्रिज्या (३४३८) से गुणा कर प्रथम स्फुट चन्द्र और
सूक्ष्म स्फुट रवि के अन्तर की ज्या से भाग दें । फल को आद्य स्फुट चन्द्र और
सूक्ष्म रवि के अन्तर की कोटिज्या से गुणन कर
त्रिज्योद्धृतं तत्पुनरर्क चन्द्रगत्यन्तरघ्नं त्रिगुणाप्त लब्धम् ।
योज्यं तदेव प्रथमेन्दु भुक्ति फलै र्भवेद् भुक्तिफलं द्वितीयम् ॥ १८ ॥
त्रिज्या से भाग देंगे । फल को प्रथम स्फुट चन्द्र गतिफल में जोड़ने से द्वितीय
गति फल होगा ।
तत्संस्कृतं मध्यगतौ पुरोवद् भवे द्वितीया रजनीश भुक्तिः ।
वर्गीकृतं पाक्षिक लिप्तिकायां हारोद् भवस्यान्त्य फलस्य वर्गात् ॥ १९ ॥
इस गति फल को चन्द्र मध्यम गति में जोड़ने या घटाने से द्वितीय चन्द्र गति
होती है । मन्द केन्द्र कर्क आदि ६ राशि में होने पर जोड़ते हैं, अन्यथा घटाते
हैं । कलां आदि पाक्षिक फल को वर्ग कर उसे परम पाक्षिक फल के वर्ग से
घटायें ।
विशोध्य तच्छेष पदं द्वितीय चन्द्रार्क गत्यन्तर संगुणं तत्
गोभूघनास्र (१७१९) सितरुग् द्वितीय भुक्तौ धनं पक्ष पुरोऽन्तिमाङ्घ्रोः । २० ।
शेष के वर्गमूल को २ य चन्द्र गति और स्फुट रवि गति के अन्तर से गुणा
कर त्रिज्यार्द्ध (१७१९) से भाग दें । (फल को चन्द्रमा शुक्ल पक्ष के प्रथमार्द्ध या
कृष्ण पक्ष के द्वितीयर्द्ध में रहते पर चन्द्र की द्वितीय गति में जोड़े ।
ऋणं पदोर्मध्यम योरितिस्यात् सूक्ष्मान्त्य भुक्तिः शशिन स्तुतीया ।
दिनान्तरेन्द्वन्तर स म्मिता वा तत्सिद्ध तिथ्यादि शुभेषु चिन्त्यम् । २१ ।
चन्द्रमा द्वितीय और तृतीय पाद (शुक्ल पक्ष द्वितीयार्द्ध या कृष्ण पक्ष प्रथमार्द्ध)
में रहने पर फल को चन्द्रमा की गति से घटायेंगे । (कुछ लोग पूरे शुक्ल पक्ष के
लिए जोड़ते हैं तथा कृष्ण पक्ष के लिए घटाते हैं) । यह तृतीय सूक्ष्म गति (चन्द्रमा
की) होगी । दो दिनों के स्फुट चन्द्र के अन्तर से प्राप्त चन्द्र गति भी व्यावहारिक
शुभ कार्यों के लिए पर्याप्त सूक्ष्म है और उससे तिथि का विचार हो सकता है ।
विष्ट्याद्यनिष्टं यदिहास्ति तत्तत्याज्यं पुनः स्थूल मते यदेतत् ।
तन्नापि हेयं बहु सम्मतत्वात् स्थूलेन नित्यव्यवहार सिद्धेः । २२ ।