सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रह स्फुटी करणम् ७३
भूयस्यन्तर के क्षय द्विवशतो भुक्त्या नुपातोत्थया
खेटर्क्ष ध्रुव जान्तरोद्धृति वशाद् यातैष्य कालेऽसकृत् । १९८ ।
दो क्रमागत पक्षान्तों के समय ग्रह स्फुट के अन्तर को दूसरे पक्ष के गत दिनों
से भाग देने पर ग्रह की दैनिक स्पष्ट गति आती है । दो क्रमागत दिनों के स्पष्ट
ग्रहों के अन्तर को व्यवहार उपयोगी स्पष्ट गति कहा जाता है । दोनों में बहुत
कम अन्तर होता है अतः पक्षान्त दैनिक गति लेने से कोई अन्तर नहीं होता । यदि
दोनों प्रकार की दैनिक गतियों में अन्तर हो तो पहले की रीति से स्पष्ट गति
निकालते हैं । ग्रह की दो स्पष्ट राशि आदि को अन्तर कर उसकी दैनिक स्पष्ट
गति से भाग देने पर फल दिन आदि आता है ।
पक्ष द्वन्द्व जतुर्य केन्द्र विवरात्तद् युक्ति लिप्ता दिनै
रानीया भिर वक्र वक्र विलयो दद्यानान्य केन्द्र ध्रुवात् ।
पक्षान्त ग्रह तुर्य केन्द्र वियु ताद्याः स्युस्तदन्तर्गता
लिप्तास्ताविवहताः फलैर्दिन मुखे लैख्यास्तव वक्रादयः । १९९ ।
प्रति पक्षान्तर में चतुर्थ शीघ्र केन्द्र गणित किया जाता है । गृह का मार्गी
और उदय होना तथा अस्त केन्द्रांश परिशिष्ट में लिखा गया है यह कहा जा चुका
शीघ्र केन्द्र अन्तर को पक्ष के अन्तर से भाग देने से है । पक्ष मध्य में शीघ्र केन्द्र
कब किस स्थान में गया यह जानने के लिये, दोनों शीघ्र केन्द्र की दैनिक गति
आयेगी । इस गति में पक्षान्त शीघ्र केन्द्र और आपेक्षिक शीघ्र केन्द्र अवस्था के
अन्तर से भाग देने पर उसका दिन आदि आयेगा ।
भक्ताश्चक्रकलाः (२१,६००) ख वह्निभि (३०) रथो सप्ताक्षिभि
(२७) र्भानुभि (१२) र्भूभृद् बाहुभि (२७) रम्बरर्तुभि (६०)
विरतालब्धाः स्वभागा क्रमात्
तिध्युक्षैन्दवराशि योग करणानां स्युः पक्षाद्रयः (७२०)
खाभ्राष्टौ (८००) ख खकुञ्जर क्षितिमिताः (१८००)
खाभ्राष्ट ( ८००) खाङ् गान्नयः (३६०) । २०० ।
(२१,६००) कला को क्रमानुसार ३०, २७, १२, २७ और ६० से भाग देने पर
तिथि, नक्षत्र, राशि, योग तथा करण के भोग का परिमाण आता है । (क्रमशः
७२०, ८००, १८००, ८००, ३६० ।
स्पष्टा र्कोनित विस्फुटे न्दुकलिका भोगेन (७२०) भक्तास्तिथे ।
र्लब्धाः स्युस्थितयोगताः प्रतिपदो दर्शान्त मासादितः ।
लब्धाः पञ्चदशाधिका यदिपदा पञ्चेन्दु (१५) शेषाश्वताः
पक्षेश्यामलके स्युरेक सहिताश्चे दू र्तमानास्तदा । २०१ ।
स्पष्ट चन्द्र की राशि आदि से स्पष्ट सूर्य की राशि आदि घटा कर कला
बनाकर ७२० से भाग देने पर गत तिथि की संख्या आयेगी । लब्ध संख्या १५