सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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प्रथम अवस्था (शीघ्र स्फुट गति अधिक) में इसे दैनिक मध्यम गति में जोड़ते
हैं। द्वितीय (शीघ्र स्फुट गति कम) और तृतीय (शीघ्र स्फुट गति वक्र) अवस्था
में इसे मध्यम गति से घटाते हैं। फल प्रथम गति है।
सम्भवेद् व्यस्त शुद्धि श्चेद् वक्रासा शेष सम्मिता
मन्द कोटि फलघ्नी सा त्रिज्या (३४३९) प्ता तत्फलार्द्धतः । १४६ ।
प्रथम गति ऋजु या वक्र होती है। इसे मन्दकोटिफल से गुणा कर त्रिज्या
(३४३८) से भाग देकर लब्धि का आधा करते हैं।
युतोना कर्किनक्रादि केन्द्रयोः स्याद्द्वित्तीयका ।
कोटिफलघ्नी त्रिज्याप्ता सा तत्पूर्ण फलेन च । १४७ ।
मन्द केन्द्र कर्क आदि ६ राशियों में रहने पर इस आधे को प्रथम गति में
जोड़ेंगे और मकर आदि ६ राशियों में मन्द केन्द्र रहने पर घटायेंगे। फल द्वितीय
गति होगा।
द्वितीय गति को मन्द कोटिफल से गुणा कर त्रिज्या (३४३८) से भाग देने
पर पूरी लब्धि से
संस्कृता मध्यमा प्राग्वत् तृ