सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 151, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ें५४ सिद्धान्त दर्पण
घटायें । शेष की ज्या निकाल कर (६८०) से गुणा कर
शनेस्त्रिशत्या (३००) थ भजेत् त्रिज्यया (३४३८) जतुलादिगे ।
तत्केन्द्रे फललिप्तादि स्वमृणं मन्दतुं गयोः । ८२ ।
गुणनफल में (बुध और शनि के लिए) ३०० से गुणा कर त्रिज्या (३४३८) से
भाग दें । लिप्तादि फल को केन्द्र मेषादि (६ राशि) में होने से उसे मन्दोच्च में
जोड़े तथा तुलादि में होने से घटायें ।
ज्ञ शीघ्रे तत्फलं वामं कुर्यात्ते स्युस्त्रयः स्फुटाः ।
भौमस्य प्रथमे शीघ्र केन्द्रे नक्रादि षट्क गे । ८३ ।
इसका उल्टा संस्कार (मेषादि राशियों के लिए घटाने तथा तुलादि राशियों
के लिए जोड़ने) बुध के शीघ्रोच्च के लिए किया जाता है, इस प्रकार तीन मानों
(बुध के मन्द और शीघ्र उच्च तथा शनिका मन्दोच्च) का स्फुट मान आता है ।
(मंगल मन्दोच्च का स्फुट निकालने के लिए) मंगल का शीघ्र केन्द्र मकर
आदि ६ राशि में रहने से
नैतत्कर्मार्थ ककर्यादौ तत्रस्यादब्दजं मृदुम् ।
तत्परोच्चाद् विशोध्यान्ते तद्भवर्ज्या खशराब्धिभिः (४५०) । ८४ ।
स्फुट संस्कार की आवश्यकता नहीं है । शीघ्र केन्द्र कर्क आदि ६ राशियों
में रहने पर मन्दोच्च संस्कार इस प्रकार होगा । गत वर्ष जनित मंगल मन्दोच्च को
परोच्च से घटाकर केन्द्र (पर) निकालें । पर केन्द्र की ज्या निकालकर उसे ४५०
से....
हन्यात् त्रिज्याप्त मस्यादि केन्द्र कोटि-कला हतम्
त्रिमलिप्ता (५,४००) प्तमेतेन संस्कृतं स्यान्मृदुः स्फुटः । ८५ ।
.... गुणा कर त्रिज्या (३४३८) से भाग दें । फल को प्रथम शीघ्र केन्द्र की
कोटि ज्या की कला से गुणा कर ५४०० (तीन राशि की कला) से भाग दें । फल
से पहले की तरह केन्द्र के अनुसार प्रथम ६ में कर्क, सिंह कन्या जिसमें संस्कार
होता है जोड़ते हैं तथा तुला, वृश्चिक, धनु के लिए घटाते हैं । मन्दोच्च में संस्कार
होगा ।
तत्कोटि फल मारस्य प्राग्वद्राक् कोटि संस्कृतम् ।
मध्यार्क गत्या गुणिताम् शनैः कोटिफलं ततः । ८६ ।
मन्दोच्च की दैनिक गति मंगल के परोच्च के उसका मन्दोच्च घटाकर (परकेन्द्र)
परोच्च की केन्द्र कोटिज्या को ४५० से गुना कर त्रिज्या (३४३८) से भाग दें । यह
मंगल का कोटिफल होगा । परकेन्द्र ०° से १८०° होने पर उसे शीघ्र कोटिज्या में
जोड़े, १८०° से ३६०° होने पर घटाये । फल को दैनिक मध्यम गति से गुणा कर
त्रिज्या (३४३८) से भाग देने से लब्धि मंगल मन्दोच्च की परोच्च के कारण दैनिक
गति होगी ।