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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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ग्रह स्फुटी करणम् ५३
शेष x २२५
──────────────────────────────────────────────────────── x २२५ = इष्ट
अगले खण्ड ज्या का पिण्ड-गत पिण्ड + गत ज्या खण्ड)
चाप
त्रिज्या वर्गाद् (११८४१४४) भुजज्या वर्ग प्रोज्झ्यवशेषतः
पदं कोटि ज्यका कोटे रवे दोर्ज्या पि साध्यताम् । ७५ ।
त्रिज्यावर्ग से भुजज्यावर्ग घटाकर शेष का मूल भुजचाप की कोटिज्या होती
है । इसी प्रकार कोटिज्या से ज्या निकालते हैं । (रवि और चन्द्र के लिये)
(कोटिज्या² + ज्या² = त्रिज्या² )
कुज्ञ शनिमन्दानां प्राक् पश्चात् चलने क्षणात् ।
ज्ञ शीघ्रस्यापि कृतोऽन्यः परोक्षाख्यः सुरोमया । ७६ ।
मंगल, बुध और शनि का मन्दोच्च और बुध शीघ्रोच्च आगे और पीछे दोनो
दिशाओं में गति पर्यवेक्षण से जानकर मैं परोक्ष नामक एक अन्य देवता की कल्पना
करता हूँ जो इन सबको प्रभावित करता है ।
सषड्भः सूर्यमध्यः स्याद् भूमिपुत्र परोक्षकः
ज्ञ परोक्षोः मृदोः शीघ्रः शीघ्रस्यापि मृदूच्चकः । ७७ ।
मध्यम सूर्य से ६ राशि (१८००) अन्तर पर मंगल का परोक्ष तथा बुध मन्दोच्च
का परोक्ष बुध का शीघ्रोच्च है तथा बुधशीघ्रोच्च का परोक्ष बुध का मन्दोच्च है ।
धृत्यं (१८) शोनः शनिर्मध्यः स्वमन्दस्य परोक्षकः ।
मन्दोच्चादि वदेतेऽपि न दृश्याः कालमूर्तयः । ७८ ।
मध्यम शनि से १८° कम दूरी पर शनि के मन्दोच्च का परोक्ष रहता है । परोक्ष
भी मन्दोच्च की तरह अदृश्य काल मूर्ति है ।
एवमन्ये सूक्ष्मरूपाः सन्त्य संख्या नभश्चराः
तथैवो पग्रहाः सन्ति ग्रहवेष्टन कारिणः । ७९।
इसी प्रकार असंख्य सूक्ष्म रूपी ग्रह आकाश में है, ग्रहों के चारों ओर उपग्रह
भी वृत्ता कार में घूमते हैं ।
ते सूक्ष्म यन्त्रलक्षत्वात् पूर्व गत्याग्रहाइति ।
उन्निता अपि धात्राद्यै रनुक्तत्वादि होज्झिताः । ८० ।
इन (सूक्ष्मों ग्रहों, उपग्रहों) की गति सूक्ष्म यन्त्रों से ही देखी जा सकती है ।
ये भी पश्चिम से पूर्व की तरफ चलते हैं इनका वर्णन ब्रह्म सिद्धान्त सूर्य सिद्धान्त
आदि में नहीं रहने के कारण मैं इनका परिचय नहीं दे रहा हूँ ।
ज्ञशीघ्रा धृति (१८) भागेन मध्यार्कः स्वमृदूच्चकौ
प्रोज्झ्य शेषात् केन्द्र दोर्ज्या हत्वा खाष्टर्तुभि (६८०) र्विंदः । ८१ ।
बुध के शीघ्रोच्च तथा मन्दोच्च एवं शनि के मन्दोच्च से उनके परोक्ष का राशि