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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 609 में से

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पृष्ठ 140

ग्रह स्फुटी करणम् ४३
तं भ्रमन्तो महीजाद्या स्तत्संगेन भुवं पुनः
परिक्रामन्ति यत्तस्मात् स प्रोक्तः सर्वकर्षकः । ७ ।
उसी मध्यम रवि के साथ रहते हुये (रवि की परिक्रमा कक्षा में रह कर )
मंगल आदि गृह पुनः पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। अतः रवि को सबका आकर्षक
कहा गया है।
तथापि कुज जीवाकिं भुक्ति भ्यो महती यतः
तद् गतिः सततंस्तेषां शीघ्र तुंगो निगद्यते । ८ ।
मंगल, बृहस्पति और शनि को दैनिक गति से रवि की दैनिक गति अधिक
होती है और सदा वे रवि के आकर्षक में हैं। अत रवि को इन ग्रहों का शीघ्रोच्च
कहा जाता है।
बुध शुक्र स्वभुक्तिभ्या मल्पत्वाद् भास्वतो गतेः
तयोर्मध्य ग्रहो भानुः स्वयं तौ शीघ्र संज्ञ कौ । ९ ।
बुध, शुक्र से रवि की गति अल्प है तथा उनके बीच सदा रवि रहता है।
अतः बुध और शुक्र को ही उन ग्रहों का शीघ्रोच्च कहा जाता है।
बुधशुक्रावनीपुत्र वृहस्पति शनैश्चरकाः
सूर्यात् क्रमेण दूरस्थाः स्व स्व कक्षासु यान्ति यत् । १० ।
सूर्य से क्रमानुसार दूर की कक्षा में बुध, शुक्र, मंगल, वृहस्पति तथा शनि
चलते हैं। अतः
विधिना तत् क्रमेणैव यन्नाल्प गतयः कृताः
सुतरामेव दृश्यन्ते तथा भूगोल वासिभिः । ११ ।
पृथ्वी से उनकी गति उसी क्रम से अधिक धीमी दिखती है। (समान गति
होने पर भी दूरी के कारण कम दिखती है)।
चन्द्रस्यत्वर्क वद् भ्रान्ति भूमे र्निकट वर्तिनः
योजनात्म गतिर्न्यूना महति लिप्तिकात्मका । १२ ।
रवि की भांति चन्द्र की पृथ्वी की अत्यन्त निकट से परिक्रमा कर रहा है
अतः चन्द्रमा की योजनात्मक गति सबसे कम होते हुए भी उसकी कलनात्मक
गति अधिक होती है।
भूगोल पेक्षया भानोज्ञ शुक्रौ निकटौ यतः
तस्माङ्क्रान्तवद् दृश्यौ चक्रार्धेऽपि सहामुना । १३ ।
बुध और शुक्र पृथ्वी अपेक्षा रवि के निकटवर्ती हैं। अतः बारह राशि के
बाद जिसप्रकार रवि के साथ होते हैं, उसी प्रकार से ६ राशि दूर होने पर भी
साथ दिखते हैं।