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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 609 में से

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पृष्ठ 130

चतुर्थः प्रकाशः
नानाविध संस्कार वर्णन
अथोच्यते स्वदेशादि संस्कारार्थं समासतः
भूमान मुत्तरे भागे विस्तराद् वक्ष्यते पुनः । १ ।
अब अपने स्थान में मध्य ग्रह संस्कार करने की विधि दी जाती है । (तृतीय
अध्याय में लंका के मध्यम ग्रह का साधन था । इस संस्कार के लिए पृथ्वी का
परिमाण संक्षेप में कहा जाता है, उत्तरार्द्ध में विस्तार से कहा गया है ।
मध्यव्यासो भुवः खाभ्रभूप (१६००) योजनसम्मितः
भचक्रे कलिकार्द्ध (१०,८००) घ्न स्त्रिborder(३४३८) भ्तः परिधिर्भवेत् । २ ।
पृथ्वी का मध्यम व्यास (विषुव रेखा पर) १६०० योजन है । इस संख्या को
१०८०० (वृत्त ३६०° की कलाओं ३६० x ६० का आधा ) से गुणा कर त्रिज्या
३४३८ (१०८०० लम्बी अर्द्ध परिधि की त्रिज्या ) से भाग देने पर पृथ्वी की परिधि
(५०२६।१० योजन) आती है ।
षष्ठांशाभ्यधिकं खां गाक्षि गग नाशुग (५०२६।१०) योजनम्
भूमध्य वेष्टनं स्वीयं लम्बज्याघ्नं त्रिज्यवया (३४३८) । ३ ।
(पृथ्वी की परिधि) ५०२६। १० योजन हैं । मध्यम भूपरिधि को लम्बज्या
(केन्द्र से ज्यार्द्ध की दूरी) से गुणा कर त्रिज्या (३४३८-२१६०० कला वाले वृत्त
की त्रिज्या ) से भाग देने पर स्पष्ट भूपरिधि मिलती है ।
हतं स्वदेशवसुधा परिधिः स्फुट मुच्यते ।
किंवार्क (१२) घ्नः सपरिधि र्विषुवत्कर्ण भाजितः । ४ ।
अथवा मध्यम भूपरिधि को १२ से गुणा कर विषुव कर्ण से भाग देने पर भी
स्पष्ट भूपरिधि आती है । विषुव दिन मध्याह्न में १२ अंगुल के शंकु की छाया
पलभा, शंकु उच्चबिन्दु से उसकी छाया की दूरी विषुव कर्ण या पल कर्ण है ।
लंका रोहित का वन्ती कुरुक्षेत्रादिनीवृतः ।
स्पृष्टा मेरुगतं सूत्रं मध्यरेखोंच्यते भुवः । ५ ।
. लंका, रोहितक, अवन्ती, कुरुक्षेत्र स्थान आदि होकर जाती हुई दोनों ध्रुवों
(मेरु) के बीच का वृत्त (देशान्तर) ही प्रधान माध्यन्दिन रेखा है । (अभी जिस
प्रकार ग्रीन विच की माध्यन्दिन रेखा को ०° (प्रधान) माना जाता है, भारत में
उज्जैन की रेखा को प्रधान मानते थे । उस रेखा पर विषुव रेखा पर का स्थान
लंका कहलाता है ।)
स्वीय देश समानोऽक्षो रेखायां विषयोऽस्तियः ।
तन्निजस्थानयो र्मध्य मानं देशान्तरं मतम् । ६ ।