सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२२ सिद्धान्त दर्पण
दिन में इतना दिन घटाने के बाद बाकी दिनों में संक्रान्ति के अगले दिन का ग्रह
शासन करेगा । इस मत से वर्षाधिपति अधिक से अधिक २७१ दिन (२७० दिन
४८ दण्ड) शासन कर सकता है ।
अतीतोऽहर्गणः स्व स्व भगणैर्गुणितोहतः
कल्प भूदिवसैर्मध्यो भगणादि ग्रहो भवेत् । २१ ।
इष्ट दिन का ग्रह आदि के लिए अहर्गण में ग्रह के कल्प भगण से गुणा कर
कल्प सावन दिन से भाग दें । (कल्प सावन दिन १५,७७,९१,७८,२८,०००)
भागफल गत भगण संख्या होगी ।
शेषाः सूर्यैः (१२) खरामैश्च (३०) षष्ट्या (६०) षष्ट्या (६०) पुनः पुनः
गुणिताः कुदिनाप्ताः स्युर्भांश लिप्ता विलिप्ति काः । २२ ।
शेष में १२ से गुण कर कल्प सावन दिन से भाग देने पर राशि, फिर क्रम
से शेष में ३०, ६०, ६० से गुणा कर कल्प सावन दिन से भाग देने पर अंश, लिप्ता,
विलिप्ता आती है ।
सूर्य सिद्धान्ते-एवं स्वशीघ्र मन्दोच्चाये प्रोक्ताः पूर्वयायिनः ।
विलोम गतयः पातास्तद् वञ्चक्राद् विशोधिताः । इति ।। २३ ।
(सूर्य सिद्धान्त से उद्धृत)- इसी प्रकार इष्ट दिन का शीघ्रोच्च, मन्दोच्च, पात
निकलेगा । लेकिन पात की गति विपरीत दिशा में होने के कारण उसकी राशि
आदि को चक्र (१२) राशि से घटा देते हैं ।
गुरोस्तु भगणायाता स्त्रिक (३) युता द्वादशा (१२) हताः
गत राशि युतास्तत्र राशि द्वय युता पुनः । २४ ।
इस रीति से गुरु का भगण आने पर उसमें ३ जोड़े । योगफल को १२ से
गुणा कर गत राशि तथा २ राशि और जोड़े ।
षष्ट्या (६०) हताश्च शेषाद्वा गताः स्युः प्रभवादयः ।
सैकाश्चेद् वर्तमानाब्दो गतैष्यां शादयस्ततः । २५ ।
योगफल का ६० से भाग देने पर शेष में १ जोड़े । इससे प्रभव से आरम्भ
कर गुरु वर्ष मिलता है ।
अर्कघ्नाः (१२) साप्रदेवांशा (३३०) भुक्त भोग्य दिनादयः
एवं सृष्ट्या दिवः सिद्धाः सर्वे लंकार्धरात्रिकाः । २६ ।
गुरु भगण में राशि के बाद अंश आते हैं और उन्हें १२ से गुणा कर उसमें
उनका १/३३० भाग मिलाओ । वह गुरु वर्ष का बीता हुआ दिन होगा । भोग्य
दिन भी इसी प्रकार निकलेगा । यह सभी दिन लंका की मध्य रात्रि से आरम्भ
होते हैं ।