सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 120, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंग्रहानयन वर्णनम् २३ :
चैत्रशुक्ला दिचान्द्राब्दो मध्यमस्य वृहस्पतेः
संक्रान्त्या वर्जितः प्रोक्तः स्मृतिज्ञैरधि वत्सरः । २७ ।
मध्य गति का गुरु यदि एक चान्द्र वर्ष (चैत्र शुक्ल से आरम्भ ) में यदि एक
ही राशि में रहे (दूसरी राशि में न जाये) उस चान्द्र वर्ष को पण्डित अधिवत्सर
कहते हैं ।
स्फुटार्क भगणस्यान्तः संक्रमौ तस्य चेद् गुरोः
लुप्त संवत्सरः सोऽयं त्र्यब्दस्पृग् गर्हितः स्मृतः । २८ ।
स्फुट गति से एक सौर वर्ष में (मेष संक्रान्ति से आरम्भ अगली संक्रान्ति
तक) यदि वृहस्पति तीन राशियों में जाय उसे लुप्त संवत्सर कहते हैं ।
स्फुटोऽतिचारवान् जीवो नैष्यति प्राग् गृहंयदा
महातिचारस्तत्कालो लुप्त संवत्सरोपमः । २९ ।
किसी सौर वर्ष में यदि गुरु स्फुट गति से अतिचार कर दूसरी राशि में जाय
और पुनः उस राशि में वापस न आये उस सौर वर्ष को महाचार काल कहते
हैं । यह वर्ष भी लुप्त सम्वत्सर की तरह निन्द्य और अमंगलकारी है ।
युगानि द्वादशत्र्रस्युः षष्ट्यब्दैः पञ्चभाजितैः ।
लब्धैः सैकैरच्युता दे र्मदानि हत शेषकाः । ३० ।
६० बार्हस्पत्यवर्ष में १० बार्हस्पत्य युग अर्थात् ५ बार्हस्पत्य वर्ष का एक
बार्हस्पत्य युग होता है । चलित बार्हस्पत्य वर्ष संख्या में ५ से भाग देकर लब्धि
में १ जोड़ने से अच्युत आदि गुरु युग होते हैं । शेष वर्षों में
वत्सा सम्परीदान्वित् पूर्वा आंगिर साः श्रुताः ।
वह्न्यर्क चन्द्रलोकेश व्योमकेशाधि दैवताः । ३१ ।
क्रम से सम्, परि, इदा, अनु, इत् बार्हस्पत्य वर्ष होते हैं । इनके अब्दिपति
क्रमानुसार अग्नि, सूर्य, चन्द्र, ब्रह्मा और शिव हैं ।
लिख्यन्तेऽथ गुरोर्मध्य राशि भोगेन लक्षिताः ।
नामानुरूप फलदाः पूर्वाचार्य्योक्त वत्सराः । ३२ ।
मध्यम मान के ६० बार्हस्पत्य वर्षों का नाम नीचे दिया जाना है । इन वर्षों
का फल उनके नामानुसार होता है । ऐसा प्राचीन आचार्यों का मत है ।
प्रभवो (१) विभवः (२) शुक्ल (३) प्रमदो (४) ऽथ प्रजापतिः ।
(५) आद्योविष्णुयुगे पञ्च सर्वे शुभ फलप्रदाः । ३३ ।
१. प्रभव २. विभव. ३. शुक्ल ४. प्रमद. ५. प्रजापति , ये प्रथम 'विष्णु' युग के
पांचों सम्वत्सर शुभ फल देने वाले हैं ।