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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

पृष्ठ 116, कुल 609 में से

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तृतीयः प्रकाश
ग्रहानयन वर्णनम्
अथाभिवाञ्छितेवर्षे मासे पक्षे तथा वपि ।
तापनैन्दव मानोत्थं सावना हर्गण क्रमात् । १ ।
किसी वर्ष के इष्ट (इच्छित् ) मास, पक्ष या तिथि में ग्रह (ग्रह की राशि
आदि) जानने के लिए पहले कल्प से (सृष्टि से) आरम्भ कर इष्ट दिन तक (सावन)
अहर्गण (दिन समूह) निकालते हैं । इसके लिए सौर और चान्द्र मास दोनों का
उपयोग होता है ।
मध्य ग्रहाद्यमाने तु स्थाप येत्कल्प वक्त्रतः ।
अतीतानां षण् मनूनां सन्धि सप्तक संयुतान् । २ ।
मध्य ग्रह आदि लाने के लिए बीते हुए ६ मनु और ७ मनु संधि लें ।
अब्दान् वैवस्वत मनोः शैल बाहु (२७) मितैर्युगैः
कृताद्यंघ्रि त्रययुतैः कल्पतीताब्द कैः समम् । ३ ।
सातवें वैवस्वत मनु में बीते २७ महायुग, ३ पाद युग (सत्य, त्रेता और द्वापर)
और कलियुग के बीच चुके और सौर वर्ष ले ।
सर्वगेकत्र संयोज्य सृष्टि कालं त्यजेत्ततः
खा भ्राम्बुधि षट् पूर्ण शैलेन्दु (१,७०,६४,०००) प्रमिताब्दकम् । ४ ।
इन सबको जोड़कर उसमें सृष्टि काल (१,७०,६४,००० वर्ष) घटायें ।
ततः शेषान् गतार्काब्दान् हत्वा द्वादशभिः पुनः ।
चैत्र शुक्लादिभिर्यार्त मासैः संयोज्यतान् पृथक् । ५ ।
शेष सौर वर्षों को १२ से गुणा कर (सौर मास करें) उसमें चैत्र शुक्ल से बीते
हुए मास में संख्या जोड़े ।
निवेश्य गुणयित्वाध पंक्ति कल्पाधिमासकैः
विभज्य कल्प सप्ताश्व मासै र्लब्धाधि मासकान् । ६ ।
इसे (सौर मासों को) दो जगह रख, एक स्थान पर कल्प अधिमास
(१,५९,३३,६,०००) से गुणा करें और गुणनफल में कल्प के सूर्य (सप्ताश्व) मास
(५१,८४,००,००,०००) से भाग दें । भागफल बीते हुए अधिमास हुआ ।
उर्ध्वे संयोजये देव चान्द्र मासा भवन्ति ते ।
त्रिंशत् (३०) घ्ना गततिथ्याढ्या द्विष्ठा कल्पति थिक्षयैः ।
इस (अधिमास) को ऊपर के (सौर मास) में जोड़ने से चान्द्र मास (कल्पारम्भ
से) निकलेगा । इसमें ३० से गुणा कर गततिथि (वर्तमान मास की) जोड़े । एक