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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१८ सिद्धान्त दर्पण
भ्राम्य द्भाति यदीय भास्वर वपुर्विभ्रद् भचक्र प्रभां
भिन्दः भीमतमः सुदर्शन मिति ख्यातं क्षयान्तं क्षितौ ।
भक्तानां भवभीत सम्भव भिदे भूभार भूतच्छिदे
धाम्ने श्याम धराधराधिपतये कस्मै चिदस्मै नमः । २५ ।
मैं नीलाचल वासी जगन्नाथ को भक्तिभाव से प्रणाम करता हूँ जो आकाश
के क्रान्तिवृत्त रूपी सुदर्शन चक्र द्वारा अन्धकार दूर करते हैं । तथा प्रलय काल में
पृथ्वी काल में पृथ्वी के भार भूत प्राणियों का संहार करते हैं ।
इत्युत्कलोज्ज्वल नृपाल कुलप्रसूत
श्री चन्द्रशेखर कृतौ गणितेऽक्षिसिद्धे
सिद्धान्त दर्पण उपाहित बाल बोधे
यातो द्वितीय इहसद् भगणः प्रकाशः । २६ ।
इस प्रकार उड़ीसा विख्यात राजकुल में उत्पन्न श्री चन्द्रशेखर कृत दृक् गणित
सिद्ध बालकों के लिए सरल सिद्धान्त दर्पण में भगण वर्णन रूप द्वितीय प्रकाश
समाप्त हुआ ।