सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंviii सिद्वान्त दर्पण
आत्मा के पर्याय-रूप
२. द्वि - जोड़ा के पर्यायवाची-युग्म, द्वितय, यमल, यम, उभ जोड़ा। अश्विनी
कुमार (२) के पर्यायवाची-अश्विन, दस। आंख (२) के पर्यायवाची
शब्द-अक्षि, ईक्षण, दृक्, चक्षु, दृक्, नेत्र, नयन, चक्षुष, लोचन, विलोचन।
हाथ के पर्यायवाची- बाहु, भुज, पंख या पक्ष (शुक्ल और कृष्ण)-पक्ष
३. (त्रि) गुण (सत्व, रज और तम) के पर्यायवाची- गुण। राम (परशुराम,
रामचन्द्र और बलराम)-राम। अग्नि (दावाग्नि, जठराग्नि, बड़वाग्नि)
अग्नि, ज्वलन, वह्नि, दहन, ऋतुभुक्, पावक, हुताशन, शिखि, अनल।
अन्य-त्रि, त्रितय
४. चतुर, तुरीय (चेतना की चतुर्थ अवस्था-सुषुप्ति, जाग्रत, स्वप्म, समाधि),
चातुर्य
वेद (ऋक्, साम, यजुर, अथर्व) के अर्थ में -वेद। कृत (सत्ययुग जिसमें
धर्म के ४ चरण थे), निगम, श्रुति। समुद्र (जल, लवण, क्षीर और श्वेत)
के अर्थ में-अब्धि, पायोधि, अम्भोधि, कूपार, वारिधि, रत्नाकरं रत्नभणार),
अम्भोनिधि, समुद्र अम्बुनिधि, उदधि, अहम्बुधि, पयोधि, अर्णव सागर,
अम्बुराशि सिन्धु, वार्द्धव
५. (पञ्च)- अर्थ (शब्द के पांच प्रकार के अर्थ होते हैं, संपत्ति पांच प्रकार की
है) के पर्याय अर्थ। इन्द्रिय (पांच कर्म या ज्ञान की इन्द्रियाँ) अर्थ में -
इन्द्रिय, विषय। बाण (कामदेव के पंचबाण) अरविन्द, अशोक, आम्र,
नवमल्लिका, नीलोत्पल) के पर्यायवाची-शर, बाण, मार्गण, इषु, अक्ष,
आशु, आशुग, विशिख, शिलीमुख, पृषत्क, सायक, पत्रिण। तन्मात्रा (५
तन्मात्राए या ५ मूल स्वरमात्राए-अ,इ,उ,ऋ, लृ)-अर्थ में- तत् (३
अध्याय १५४ श्लोक)
६. षड्, रस (६ रस भोजन के तिक्त, मधुर, लवण, काषाय, समअम्ल)। अंग
(५ कर्मेंद्रिय और मन), ऋतु (ग्रीष्म, वर्षा, हेमन्त, शिशिर, शरत्, वसन्त)
तर्क (षड् दर्शन)
७. सप्त। घोड़ों के अर्थ में (सूर्यकिरण के सात रंग सूर्यरथ के सात घोड़ों
के समान है)- वाजि, अश्व, हय, तुरंग। मुनि (सप्तर्षि)-मुनि दिति। स्वर
(संगीत के सात स्वर-षड्ज, ऋषभ, गान्धार, मध्यम, पञ्चम, धैवत और
निषाद), सर। पर्वत (भारत के सप्त पर्वत)-महीध्र, महीधर, भूमिधर,