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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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सिद्धान्त दर्पण
गुणित, गुण्या, गुण्यते, गुण्या, गुण्यात्, संगुण, संगुणय्य, संगुणा, संगुणित,
संगुणा, संगुण्य
(४) ताड् (पीटना)- अभिताड़ित, ताड़ित
(५) वृत् (बार बार करना) उद् वर्त ना
(६) हन् (वध करना, मारना), अभिनिघ्न, अभिहत, अभिहत्य, आहत, आहत्य,
आहन्यात्, घात, घ्न, निघ्न, निहत, निहत्य, प्रणिघ्न, प्रणिहत्य, विसंहति,
संहति, संहत्य, संहन्यात्, समाहत, हत, हतम्, कृत्वा, इतहित्वा ।
४. भाग -
(१) खण्ड (तोड़ना) खण्ड्यात्
(२) छिद् (काटना, तोड़कर अलग करना, बांटना) -छित्त्वा, छिद्यते, छिन्द्यात्
छेद, छेद्य, संछेद
(३) भज् (बांटनां, भाग करना)- प्रविभजेत्, भक्त, भक्ते, भक्तव्या, भक्तूवा, भजन,
भजित, भजेत्, भाग, भागहार, भागे हते, भाजयेत, भाजित भाज्यम, भाज्य,
भाज्या विभक्त, विभजेत्, विभजेत, विभज्य विभज्यते विभाजित
विभाजयेत्
(४) भञ्ज् (फाड़ना, टुकड़ों में तोड़ना)- भंक्त्वा
(५) वृत् (अपने साथ)- अपवर्तन
(६) हृ (छीनना, बांटना)- अपहृत, आहरेत्, उद्धृत, उपाहर, विहृत, संहृतम्,
संहृत, संहृता, समद्धृत, हरतु, हरेत, हर्तव्या हृत, हृति, हते, हृत्वा, ह्रियते,
ह्रियमाण
५. वर्ग-कृति, याव, वर्ग, वर्गितम्, वर्गणा
६. वर्गमूल-द्विगतमूल, पद, मूल, वर्गमूल
७. घन-धन, त्रिगत, वृन्द, सदृश, त्रयाभ्यास
८. घनमूल-घनमूल, त्रिगतमूल