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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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१२ सिद्धान्त दर्पण
अर्का (१२) शो भर्गणस्य राशिगृह भक्षेत्रर्क्षनामास्य तु ।
त्रिंशां (३०) शोऽपि लवांश भाग उदितस्तत्षष्ठि (६०) भागः कला ।
लिप्ता तत् खरशांश (६०) कस्तु विकला तत्तत्खषड् (६०)
भागकै र्गत्यर्थं कथिताः पराद्यवयवाः प्राक् सूरिभिर्भूरिशः । ५४ ।
भगण (वृत्त) के १/१२ भाग को राशि कहते हैं । राशि, गृह, भ, क्षेत्र, ऋक्ष
आदि इसी के नाम हैं । राशि का १/३० भाग अंश है । लव और भाग अंश के
अन्य नाम है । अंश के १/६० भाग को कला या लिप्ता कहते हैं । कला के १/६०
भाग को विकला या विलिप्ता कहते हैं । विकला के १/६० भाग और उसके भी
१/१६० भाग को परा, विपरा आदि कहते हैं । प्राचीन आचार्यों ने ये सब नाम
ग्रह गति के वर्णन में प्रयोग किये हैं ।
यः पूर्वत्र परार्द्ध के स्मवसति श्री माधवा रूयां दधद्-
गुप्तः कृत महेन्द्र नीलतनरुक, नीलाचला ग्रस्थले ।
द्वैतीयीक परार्ध केऽधम जनानुद्धर्तु कामः स्फुटं ।
धत्ते दारव धाम मामवतुमा कान्तः स सन्तायतः । ५५ ।
प्रथम (पाद म्य नामक) परार्ध में महेन्द्र नील कान्ति वाले नीलगिरि के शिखर
पर श्री नीलमाधव के नाम से जो वास करते थे, वही द्वितीय परार्द्ध (वाराह) में
पतितों के उद्धार के लिए दारु ब्रह्म रूप में प्रकट हो वहीं रहते हैं, वह लक्ष्मीकान्त
श्री जगन्नाथ मेरा कष्ट दूर करें ।
इत्युत्कलोज्ज्वल नृपाल कुल प्रसूत-
श्रीचन्द्रशेखर कृतौ गणितेऽक्षिसिद्धे
सिद्धान्त दर्पण उपाहित बाल बोधे
शुद्धोऽगमत्समयभाक् प्रथमः प्रकाशः । ५६ ।
उड़ीसा के उज्ज्वल राजकुल में जन्मे श्री चन्द्र शेखर के दृक् सिद्ध गणित
ग्रन्थ सिद्धान्त दर्पण को बच्चे भी समझ सकते हैं । उसका प्रथम प्रकाश समाप्त
हुआ ।