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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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द्वितीयः प्रकाशः
भगण आदि का वर्णन
सूर्यज्ञा स्फुजितां पुरोगतिमतो कोटिघ्न दन्ताब्धयः (४,३२, ००,०००)
कल्पेस्युर्भगणाः शनिज्य कुभुवां ते चैव शीघ्रोच्चजाः ।
खाभ्राभ्रांगसुराग्नि मार्गण गिरि ग्रावेषवः (५७,७५,३३,३६, ०००) शीतगो
रादित्य क्षितिभू नगाष्ट रसगो दृक् बाहवो (२९,९६,८७,११,१२) भूभुवः । १ ।
एक कल्प में सूर्य के पश्चिम से पूर्व के भगण ४,३२,००,००, ००० हैं ।
(कोटि = १ करोड़, दन्त = ३२, अब्धयः = ४ समुद्र) यही भगण बुध और
शुक्र के (अस्फुजित) के हैं । मंगल, गुरु और शनि के शीघ्रोच्च यही है ।
चन्द्र (शीतगः) के एक कल्प के भगण ५७, ७५, ३३, ३.३, ३६,००० है ।
(ख = ०, अभ्र = ०, अंग = ७, सुर = ३३, अग्नि = ३, मार्गण (बाण) = ५,
गिरि = ७, ग्रौ = ७, इषवः (बाण) = ५) ।
मंगल के एक कल्प के भगण २, २९, ६८, ७१, ११२ है ।
(आदित्य = १२, क्षिति, भू = १, नग = ७, अष्ट = ८, रस = ६, गो (इन्द्रिय)
= ९ दृक् (आंख), बाहवो (बाहु) = २) ।
क्विन्द्राद्यंग नवांग राम नववाज्यब्जा (१७,९३,६९,६७,१४१) ज्ञशीघ्रोच्चजा
बाणाभ्रेक्षण बाणबाण धरणी वेदर्तु रामाः ( ३६,४१,५५,२०५) गुरोः
षष्ट्यष्टा द्विशराक्षि दृक् भुजनभः शैला (७,०२,२२,५७,८६०) मृगोः शीघ्रजा ।
भूपाद्र्यं क कृतांग षट्क मनवः (१४,६६,४९,७१६) सौरैर्मताः पर्ययाः । २ ।
बुध (अज्ञ) के शीघ्रोच्च का कल्प भगण (१७,९३,६९,६७,१४१ ) है । (कु
(पृथ्वी) = १ख इन्द्र = १४ प्रति मन्वन्तर ) अद्रि (पर्वत) = ७, अंग = ६, नव
= ९, राम = ३, वाजि (अश्व) = ७ सूर्य रश्मि) अब्ज चन्द्र = १, गुरु का
कल्प भगण (३६, ४१, ५५, २०५) हैं ।
शुक्र शीघ्रोच्च का कल्प भगण (७, ०२, २२, ५७, ८६०) हैं । शनि का कल्प
भगण (१४, ६६, ४९, ७१६) है ।
सूर्यात्पूर्वग मन्दतुंग भगणाः पाथोधिरामाग्नयः. (३३४)
शून्यऽम्भोधि नवाद्वि रुद्र भुजग स्तम्पेरमाम्भोधय, ( ४८,८१,१७,९४० ।
पूर्णेन्दुज्वलनाः (३१०) खचन्द्रनिगमा (४१०) बाणाभ्रनागा (८०५) कुभृत्
पञ्चेषु प्रमिताः । (५५७) खसमय (७०) इति ज्ञेया पदच्छेदतः । ३ ।
पूर्व से पश्चिम की तरफ सूर्य के मन्दोच्च के कल्प भगण ३३४ हैं । चन्द्रमन्दोच्च
के कल्प भगण (४८, ८१, १७, ९४०) हैं । मंगल मन्दोच्च का (३१०) बुध मन्दोच्च
(४१०), गुरु मन्दोच्च (८०५), शुक्र मन्दोच्च (५५७) तथा शनि मन्दोच्च (७०) है ।