सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकाल वर्णनम् ९
मन्वन्तरं चन्द्र महीध्र (७१) संख्यैर्महायुगै सत्ययुगप्रमाणः (१७,२८,०००)
सन्धिस्तदन्ते जलसम्प्लवारूयः सर्वादिमः स्यात् खलुसन्धिरेकः । ३६ ।
७१ महायुग के एक मन्वन्तर होता है । प्रत्येक मन्वन्तर के अन्त में सत्ययुग
के बराबर एक सन्धि होती है । जल प्रलय के बाद जब जन सृष्टि का प्रारम्भ
होता है तो पहले मन्वन्तर के पहले भी एक सन्धि (सत्ययुग के बराबर ) होती
है ।
शरेन्दु (१५) भिः सन्धिभिरन्वितैस्तैर्मन्वन्तरैः स्यादशभिः चतुर्भिः (१४)
दिनं विधेः कल्प इति श्रुतं तद् युगैः सहस्रेण मितं निशापि । ३७ ।
१५ सन्धियों से विभक्त १४ मन्वन्तरों का ब्रह्म का एक दिन होता है जिसे
कल्प कहते हैं । इसमें १००० (महायुग या) युग (१४ मन्वन्तर X ७१ युग + १५
सत्य युग x ४/१० युग) होते हैं । इतने ही (१००० युग ) समय की ब्रह्मा की
रात्रि होती है ।
तावत्प्रमाकल्पयुगं द्युरात्रिमित्थं समाना शतमायुरस्य ।
परामहाकल्प इतीरितं तत् परार्द्ध माद्यं किल नाम पाद्म्यम् । ३८ !
इस प्रकार दो कल्पों का ब्रह्मा का अहोरात्र, इस अहोरात्र का जो वर्ष होगा
(३६०x२ कल्प) वैसे १०० वर्ष की ब्रह्मा की आयु है जिसे महाकल्प या परा कहते
हैं । पहले परार्द्ध (५० ब्रह्मवर्ष) का नाम पाद् म्य था ।
वराहमदूर्ध्वन्व परम्पराया वदन्त्यदः कल्पयुगञ्च विज्ञाः ।
अजादिगत्वात्समयस्य नाहं जाने व्यतीताः कत लोकनाथाः । ३९ ।
दूसरे परार्द्ध का नाम वराह है । काल अनादि है अतः कितने ब्रह्म बीत चुके
यह नहीं कहा जा सकता ।
प्रवर्त्तमानस्यविधेरिदानीं व्यतीतमर्धं परमायुषोऽस्य
अत्रा दिमे शेष दलस्य घस्रे ससन्धयः षण्मनवोऽव्यतीताः । ४० ।
वर्तमान ब्रह्मा के परार्द्ध का प्रथम दिन चल रहा है जिसमे सन्धि सहित ६
मनु बीत चुके ।
स्वायम्भुवः प्राङ् मनुराविरासीत् स्वारोचिषश्चोत्तम तामसौ च
रैवतारूय, खलु चाक्षुषोऽनु वैवस्वतः सप्तम एष आस्ते । ४१ ।
क्रमानुसार ६ मनु बीते हैं । स्वायम्भुव, स्वारोचिषु उत्तम , तामस, रैवत और
चाक्षुष । सप्तम मनु का नाम वैवस्तत है ।
अस्यान्तरे यातवती युगानां सप्ताधिकाविंशति (२७) रन्यतश्च ।
युगाद् गतः सत्य मुखा त्रिपादाः कलेः खसप्तांक महार्णवाब्दाः (४९७०) ।४२।
सप्तम मनु में २७ महायुग बीते तथा २८ वें महायुग में सत्य, त्रेता और द्वापर