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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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८ सिद्धान्त दर्पण
चन्द्रतिथि में विभक्त है । एक संक्रान्ति सेअगली संक्रान्ति तक का समय सौरमास
कहलाता है ।
तद्विएवस्तरो ऽप्युत्तर भाग वाच्योऽर्क (१२) संख्यैः स्तपनस्य मासैः ।
स्यात्सौर संवत्सर एष दिव्यं दिनं तथा दानुज मित्यवेतः । ३१ ।
इन नाक्षत्र, सावन, तिथि, सौर आदि मास का विस्तृत विवरण ग्रन्थ के
उत्तरार्द्ध में है । १२ सौर मास का एक सौर वर्ष तथा एक सौर वर्ष का एक दिव्य
या आसुर दिन होता है ।
देवासुराणां दिन रात्रि भोगो विपर्यये णार्क गति प्रभेदात्
तेषान्तु षष्ट् युत्तरयात्रिशत्या (३६०) दिव्यं भवेदासुर मेव वर्षम् । ३२ ।
सूर्य की उत्तर और दक्षिण गति के कारण देवता असुरों का अहोरात्र होता
है । (सूर्य ६ मास उत्तरी गोलार्द्ध में रहने पर उत्तर ध्रुव में दिन एवं दक्षिणी ध्रुव
में रात होती है । जिसे देवताओं का दिन और असुरों की रात कहते हैं) । ३६०
दिव्य या असुर दिनों का १