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सर्वकोश
सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)

Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara

सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा

DevanagariHindipublished609 पृष्ठ

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६ सिद्धान्त दर्पण
यत्तेज क्षुब्धमाया जनित महदहंकार तन्मात्र भूतोद्
भूताण्डाधीश नाभ्युद्भव भुवन मयाऽम्भोजगर्भात्स्वयं भू ।
भूत्वा भूतेर्भूतानि त्रिभुवन भवनान्या रचश्या स्वधाम्नि
ध्यायं ध्यायं यमास्ते स जयति परम ब्रह्मधामादि देवः । २१ ।
जिसके तेज से क्षुब्ध हो प्रकृति ने महत्तत्व को जन्म दिया, महत्तत्व से
अंहकार और उससे पांच तन्मात्रा, पांच, महाभूत (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और
आकाश), एकादश इन्द्रियां (पांच, कर्मेन्द्रियां, पांच ज्ञानेन्द्रियां और मन) होते हैं,
उस ब्राह्माण्ड के स्वामी के नाभि कमल से उत्पन्न स्वयंभू ब्रह्मा पंचभूतो के संयोग
से तीन भुवनों की रचना करते हैं, और अपने धाम में रह जिसका ध्यान करते
हैं, वह आदि परम ब्रह्म हमारा पालन करें ।
स्रष्टा सृष्ट्वा भचक्रं ध्रुव युगल युतं सम्रहं सन्नियुक्तं
नित्यभ्रान्तावनान्तो भुवि भवि कवि कर्माद्यभिव्यक्ति हेतोः