सिद्धान्तदर्पण (महामहोपाध्याय सामन्त चन्द्रशेखर सिंह - नग्न-नेत्र खगोल वेध एवं गणित महाकोश)
Siddhanta Darpana of Mahamahopadhyaya Samanta Chandrasekhara
सामन्त चन्द्रशेखर सिंह (सम्पादक: प्रो. योगेशचन्द्र राय) द्वारा
पृष्ठ 100, कुल 609 में से
संदर्भ में पढ़ेंकाल वर्णनम् ३
अनुसार है, अतः दोनों का परस्पर सम्बन्ध अपरिवर्तित है । वर्ष का कुछ भी मान
हो उसमें पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर लगायेगी, या एक दिन में पृथ्वी का अपने
अक्ष पर एक चक्र होगा । पृथ्वी की गति सूक्ष्म ज्ञात होने पर वर्ष और दिन भी
ज्यादा शुद्ध रूप में ज्ञात होंगे पर उनका परस्पर सम्बन्ध वहीं रहेगा । अन्य ग्रहों
की गति उपकरणों की सूक्ष्मता के अनुसार कम या ज्यादा शुद्ध देखी जती है या
गणित की नयी विधि के अनुसार ज्यादा शुद्ध गणना हो पाती है ।
तत्तद् ग्रन्थेषु यस्मिन् न भवति सुमहत्तारतम्यं ग्रहादे-
दृक् सम्वादात् सतथ्यो बहुतरतमतः कथ्यते ऽसावतथ्यः ।
पूर्वाचार्यैस्तदस्मद् ग्रथनमति चिरस्थायि दृक् सिद्ध भावा -
दव्यर्थं भव्य सेव्यं भवतु हि भवितो भावि भूतानभिज्ञाः । ८ ।
पूर्व आचार्यों ने भी कहा है कि नये ग्रन्थों द्वारा साधित ग्रह और उनके देखे
गये स्थान में बहुत कम अन्तर हो तो उन ग्रन्थों को उपयुक्त समझा जाता है ।
किन्तु ज्यादा भेद होने पर उसे बेकार माना जाता है । इस ग्रन्थ द्वारा सिद्ध ग्रह
उसी स्थान में दिखायी देते हैं । अतः मेरा विश्वास है विद्वान् इसे परीक्षा कर
ग्रहण करेंगे और यहां बहुत काल तक उपयोगी रहेगा ।
यदैवदृक् गोचरतां यदेति तदा तदेवाद्रियते हि शास्त्रम्
सद्वासना वार्तिक एवमाह पश्यत् जनानल्य मतीन् नृसिंहः । ९ ।
(भास्कर विरचित सिद्धान्त शिरोमणि) की 'वासना वार्तिक' नामक टीका
में (ज्योतिर्वित्) नृसिंह ने कहा है कि सामान्य लोगों की बुद्धि कम हैं, अतः जो
शास्त्र प्रत्यक्ष होता है उसी की संसार में प्रतिष्ठा होती है ।
शास्त्रे कृते यदि जगद् व्यवहार हेतौ
गम्भीरता भवति तन्निखिल प्रवृत्तिः ।
न स्यातदोऽत्र गणिते सुगमाभिधेये
शब्दस्य पाटव मनादरणीय मेव । १० ।
यदि लोक व्यवहार के लिये शास्त्र लिखना है तो उसमें शब्द और अर्थ की)
गम्भीरतां होने से लोगों की रुचि नहीं होगी । अतः उसमें शब्द प्रयोग की कुशलता
के बदले गणित का सरल वर्णन जरूरी है ।
स्कन्ध त्रयस्य मध्ये गणित स्कन्धो विचित्र एवादौ ।
होरा जातक वेदीयमृते कृत्येषु संशेते । ११ ।
गणित, फलित और मुहूर्त-इन तीन स्कन्धों में ज्योतिष शास्त्र विभक्त है ।
इसमें गणित का स्थान प्रथम है, क्योंकि इसके बिना फलित और मुहूर्त के काम
में सन्देह होता है ।
श्री भास्करोक्त पाटी विमलास्ते तन्मयापि सा नोक्ता
ग्रह गणितारम्भोयं भूयाद् भव्याय भूतानाम् । १२ ।