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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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महावीरी व्याख्या चौ. ४०: तुलसीदास सदा हरि-चेरा
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
तुलसीदास सदा हरि-चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ ४० ॥
शब्दार्थ—हरि-चेरा ▸ श्रीरामजीके सेवक।
अर्थ—हे कीशनाथ श्रीहनुमान्‌जी महाराज! आप निरन्तर भगवान्
श्रीरामके कैङ्कर्यमें निरत रहते हैं, अतः उसी कृपालुतावश तुलसीदासके
हृदयमें निवास कीजिए। यद्वा गोस्वामीजी कहते हैं कि आञ्जनेय! आप
निरन्तर भगवद्भक्तके हृदयमें निवास कीजिए। अथवा, मैं तुलसीदास निरन्तर
हरि अर्थात् वानरश्रेष्ठ आपश्रीका सदैव दास हूँ; हे नाथ! आप मेरे हृदयमें
श्रीराम-लक्ष्मण-सीता सहित निवास कीजिए।
व्याख्या—अन्तमें गोस्वामीजी अपने हृदयमें निवास करनेके लिए किंवा
वैष्णवजनोंके लिए हनुमान्‌जीसे प्रार्थना करते हैं। हरि-चेरा शब्दका नाथ,
हृदय, तथा तुलसीदास शब्दसे अन्वय करनेपर उपर्युक्त तीनों अर्थ संगत
हो जाते हैं। अर्थात् नाथ सदा हरि-चेरा तुलसीदास हृदय महँ डेरा
कीजै—इस अन्वयसे प्रथम अर्थ; तथा तुलसीदास नाथ हरि-चेरा हृदय
महँ सदा डेरा कीजै—इस अन्वयसे द्वितीय अर्थकी पुष्टि हो जाती है। यहाँ
(दूसरे अर्थ में) तुलसीदास शब्दके साथ कहत इस बाहरी क्रियाको जोड़ना
पड़ता है, जैसे अन्यत्र। यथा—शरद सरोरुह नैन तुलसी भरे सनेह जल
(रा.च.मा. २-२२६)। तुलसीदास सदा हरि-चेरा नाथ हृदय महँ डेरा
कीजै—इस अन्वयसे तृतीय अर्थकी पुष्टि होती है।
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