सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

पृष्ठ 53, कुल 110 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 53

महावीरी व्याख्या चौ. ११: लाय सँजीवनी लखन जियाये
॥ श्रीराम ॥
मूल (चौपाई)—
लाय सँजीवनी लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥ ११ ॥
शब्दार्थ—सँजीवनी ▸ द्रोणाचलसे लाई हुई मृतसंजीवनी।
अर्थ—हे पवननन्दन! आपने द्रोणाचलसे मृतसंजीवनी ले आकर
श्रीलक्ष्मणको जिलाया तथा रघुवीर रामभद्रजूने प्रसन्नतासे आपको अपने
हृदयसे लगा लिया।
व्याख्या—कालके विजेता मेघनादने कालस्वरूप श्रीलक्ष्मणको
वीरघातिनी शक्तिसे मूर्च्छित किया। अनन्तर करालं महाकालकालं
कृपालं (रा.च.मा. ७-१०८-२) श्रीहनुमान्जी मूर्च्छित कालको कालातीत
श्रीराघवके पास ले आए तथा उन्होंने सुषेणके निर्देशानुसार संजीवनी ले
आकर श्रीलक्ष्मणको प्राणदान दिया एवं श्रीराघवके मङ्गलमय परिष्वङ्गका
अनुभव किया। यथा—
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना।
अति कृतज्ञ प्रभु परम सुजाना॥
—रा.च.मा. ६-६२-१
३९