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सर्वकोश
श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

श्री हनुमान चालीसा, संकटमोचन हनुमानाष्टक एवं बजरंग बाण (महावीरी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Shri Hanuman Chalisa with Mahaviri Commentary

गोस्वामी तुलसीदास (व्याख्याकार: स्वामी रामचन्द्रदास 'महावीर') द्वारा

DevanagariHindipublished110 पृष्ठ

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पृष्ठ 17

आमुख
उद्यच्चण्डकराभभव्यभुवनाभ्यर्चाप्रदीप्तं वपु-
र्बिभ्रन्मञ्जुलमौञ्जसूत्रमनघं घर्मघ्नकान्तस्मितम्।
सीतारामपदारविन्दमधुपः प्रावृट्पयोदद्विषां
झञ्झावातनिभो भवाय भवतां भूयान्मुहुर्मारुतिः ॥
साहित्य-गगनके मरीचिमाली एवं कविता-कामिनी-यामिनीके
शारद निष्कलङ्क शशाङ्क, रामभक्ति-भागीरथी-सनाथित-हृदय-धरातल,
सकल-कविकुल-शेखर, वैष्णव-वृन्द-वृन्दारकेश, सीतारमण-पदपद्म-
पराग-परिमल-मकरन्द-मधुकर, कलिपावनावतार, प्रातःस्मरणीय,
परम आदरणीय श्रीमद्गोस्वामी तुलसीदासजी महाराजकी कृतियोंमें
श्रीहनुमान्-चालीसाको भी बहुचर्चित रूपमें स्थान प्राप्त है। गुणगृह्या
वचने विपश्चितः (कि. २-५) की दृष्टिसे यह विषय विशेष आलोचनीय
नहीं है, तथापि कुछ विचार करना अनुपयुक्त भी नहीं होगा। गोस्वामीजीके
ही द्वारा श्रीकाशीमें प्रतिष्ठित श्रीसंकटमोचन-हनुमान्जीके मन्दिरमें भी यह
हनुमान्-चालीसा स्तोत्ररत्न भित्तिपर लिखा हुआ लेख रूपमें आज भी
दृष्टिगोचर है। मानसजीके तथा गोस्वामीजीके अन्य सर्वमान्य ग्रन्थरत्नोंकी
प्रसंग-संगति भी इस ग्रन्थके प्रसंगोंसे एकवाक्यतापन्न हो जाती है।
यथा—लाय सँजीवनि लखन जियाये (ह.चा. ११), तुम उपकार
सुग्रीवहिं कीन्हा (ह.चा. १६), तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना (ह.चा.
१७) इत्यादि प्रसंग मानससे पूर्णतया मिलते हैं। श्रीहनुमान्-विभीषण-संवाद
श्रीमानसजीके अतिरिक्त गोस्वामीजीके अन्य किसी ग्रन्थमें शब्दतः चर्चित