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सर्वकोश
शिवताण्डव स्तोत्रम् (लङ्काधिपति रावण प्रणीत - सान्वय संस्कृत मूल एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

शिवताण्डव स्तोत्रम् (लङ्काधिपति रावण प्रणीत - सान्वय संस्कृत मूल एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shiva Tandava Stotram of Ravana

दशानन रावण (व्याख्याकार: पं. ज्वाला प्रसाद चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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( ४२ )
जो से सुशोभित जटावाले, तेज रूप नरमुंडधारी शिवजी हमको
अक्षय सम्पत्ति दें ॥५॥
सहस्त्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर-
प्रसूनधूलिधोरणीविधूसराङ्‌घ्रिपीठभूः ।
भुजंगराजमालया विबद्धजाटजूटकः
श्रियै चिराय जायतां चकोर बन्धुशेखरः ॥६॥
इन्द्रादि समस्त देवताओं के सिर में सुसज्जित पुष्पों की
धूलिराशि से धूसरित पादपृष्ठ वाले सर्पराजों की मालाओं से
विभूषित जटा वाले चन्द्रशेखर भगवान हमें चिरकाल के लिए
सम्पदा दें ॥६॥
करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥७॥
धक् धक् धक् जलती हुई अपने मस्तक की भयंकर ज्वाला
से प्रचण्ड कामदेव को भस्म करने वाले तथा पर्वत राजसुता