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शिव सूत्र (क्षेमराज विमर्शिनी व हिन्दी व्याख्या सहित)

Shiva Sutras with Kshemaraja Vimarshini & Hindi Translation

महर्षि वसुगुप्त / आचार्य क्षेमराज द्वारा

स्रोत: काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · काश्मीर शैव दर्शन ट्रस्ट · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished108 पृष्ठ
  • ८० -
    पृष्ठ
    भोक्तैव भोग्यभावेन० (सू० २९) ५४
    यदा क्षोभः प्रलीयेत० (सू० ९) २१
    ३५. स्वच्छन्द तन्त्र
    अहमेवपरो हंसः ४९
    उद्बोधितो यथा वह्निः० (१० प० ३७१ श्लो०) ७१
    त्रिगुणेन तु जप्तेन० (६ प० ५४ श्लो०) ५७
    पाशावलोकनं त्यक्त्वा० (४ प० ४३४ श्लो०) ३३
    यत्र यत्र मनो याति ज्ञेयं तत्रैव० (४ प० ३१३ श्लो०) ४५
    यस्य ज्ञेयमयो भावः० (४ पू० ३१२ श्लो०) ४५
    विषयेषु च सर्वेषु इन्द्रियार्थेषु० (४ प० ३१४ श्लो०) ४५
    समनान्तं वरारोहे० (४ प० ४३२ श्लो०) ३३
    सर्वतत्वानि भूतानि० (७ प० २४५ श्लो०) ३६
    सुप्रदीप्ते यथा वह्नौ० (४ प० ३९८ श्लो०) ४७
    ३७. श्रीमत् स्वामी लक्ष्मण जू
    There is a point twixt sleep and waking. ६३
    ३८. श्रुति वाक्य
    तत्सृष्ट्वा तस्मिन्नेव प्राविशत् ५४
    न तस्य प्राणा उत्क्रामन्ति० (छां० उ० ४-४-६) २५
    प्रारब्धकर्मणां भोगादेव क्षयः ४६
    शरवत्संहितो भवेत् १९
    सर्वमिदमहं च ब्रह्मैव
    ३९. विविध
    अज्ञानैकघनो नित्यं० ५६
    अयं रसो येन मनागवाप्तः०
    तावद्वै ब्रह्मवेगेन न० ४
    दर्शनात्स्पर्शनाद्वापि०
    ....न तु ऋजुत्वं शुष्कवृक्षवत् ० ३८
    यत्र यत्र मिलिता मरीचयः० ३५
    यैवचित् गगनाभोगे ५८
    शक्तयोऽस्य जगत्कृत्स्नं ५१
    सुखे दुःखे विमोहे च स्थितः० ८

सूत्र के अनुसार

शिवसूत्र-विमर्श
शुद्धि-अशुद्धि पत्र
पृष्ठ पंक्ति शब्द शुद्ध अशुद्ध
७ १४ ६ठा कैवल्योपनिषद् कठोपनिषद्
८ २९ ३रा होकर हाकर
१० १९ १ला देहादि देहाहि
१५ ३ ३रा वह बह
१८ ३३ १ला विद्यासमुत्थान वद्यासमुत्थान
१९ ९ ३रा (१२-६) (२२-६)
१९ १४ ८वां अनुकरण अनुसरण
२० २१ ८वां " .,
२१ २१ ३रा १८ २८
२१ २२ ६ठा निर्मुक्त विमुक्त
२७ ३० ७वां युक्तियों व्यक्तियों
२८ ५ १३वां शक्ति व्यक्ति
२८ १५ ४था योगी योगो
२८ १९ ५वां १२८ २२८
२८ १९ ७वां १६-१९ २६-२९
२९ ४ ४था पंच प्रवाहों पंच
३३ २० ३रा हेतुरूपिणी सेतुरूपिणी
३७ २६ ४था विभाव्यते विभाज्यते
४१ ९ १३वां द्वार द्वारा
४४ ५ १५वां 'विद्यासंहारे तदुत्थ- उसे... तुर्यावस्था
स्वप्नदर्शनम्' (२-
१०)—शुद्ध विद्या के
लोप होने पर उस से
उत्पन्न भेदमय प्रपञ्च
में डूबता है—इस
सूत्र के अनुसार

  • ८२ -
    पृष्ठ पंक्ति शब्द शुद्ध अशुद्ध
    ४६ ४ ७वां भली भला
    ५१ ४ ७वां समर्थ) (समर्थ)
    ५७ २६ ६ठा गुणता का गुणता
    ६० २६ ६ठा को का
    ६० २८ १ला लेहनामन्थनाकोटैः लेहनामन्थनाकोटौ
    ६० २९ १ला शक्त्याभावेऽपि शक्ताभावेऽपि
    ६२ १३ ९वां मल— मल-
    ६२ १५ १ला हटने हटाने
    ६२ २१ २रा × आप
    ६२ २१ ५वां आप चित्स्वरूप चित्स्वरूप
    ६३ (नोट १.)४ ९वां hideous hidepus
    ६३ ( ,, )६ ८वां throttle toeerate
    ६३ ( ,, )७ Missing All those shalt. —
    thou toierate
    ६५ ३० ९वां × जैसे
    ६७ १ ७वां सद्गुरु सद्गुण
    ६८ (नोट १)४ ३रा स्वपितराः स्वपितरः
    ७१ नोट १ के साथ यह प्रमाण श्लोक जोड़ लेना चाहिए—
    अयं रसो येन मनागवाप्तः स्वच्छन्दचेष्टानिरतस्य तस्य ।
    समाधियोगव्रतमन्त्रमुद्रा जपादिचर्या विषवद्विभाति ॥
    अर्थ—वह परम-शिव भाव में रस-रत्ता मगन-मत्ता रहता है । इस निरपेक्ष
    भाव में अब चिन्तन के लिए बैठना, नौरात्रादिव्रत, नियन्त्रणार्थ मुद्राएँ तथा
    प्रार्थनादि उसे विष जैसे लगते हैं।
    ७२ ३० १०वां चैतन्यमात्मा चैत्यमात्मा
    ७३ ११ सूत्र ८ स्वतोऽनुभवात् स्वतोऽनुवात्
    ७३ १७ सूत्र १४ चित्तस्थितिवच्छरीर चित्तस्थितिवच्छरो
    ७४ ६ सूत्र ३१ सत्त्व-सिद्धिः सहैव-सिद्धिः
    ७४ २३ सूत्र ४८ मात्रस्वप्रत्ययसंधाने मात्रास्वरूपप्रत्यसंधाने
    ७६ ४१ १ला प्रविशेत्तत्स्वचेतसा प्रविशोत्तत्स्वचेतसा

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विषयों का संक्षिप्त सार पुस्तक की मुख्य विशेषताएँ हैं।
मोतीलाल बनारसीदास
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