सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

शिव संहिता (भगवान् शिव प्रणीत - हठयोग एवं राजयोग सटीक)

Shiva Samhita with Hindi Commentary

भगवान् शिव / पं. मिहिरचन्द्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished216 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 216 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 47

द्वितीयपटलः। ( ४३ )
त्रिकोण योनि है यह योनि सब तंत्रों करके गोपित है
अर्थात् इसके प्रकाशकरनेकी आज्ञा किसी शास्त्रमें
नहीं है ॥ २२ ॥
मूलम्-तत्र विद्युल्लताकारा कुण्डली परदे-
वता॥सार्द्धत्रिकरा कुटिला सुषुम्णा मार्ग
संस्थिता ॥ २३ ॥
टीका-उसी स्थानमें कुण्डलिनी देवता साढेतीन
हात कुटिला अर्थात् टेढी जिसकी प्रभा विद्युतके
समान है सुषुम्णाके मार्गमें स्थित है ॥ २३ ॥
मूलम्-जगत्संसृष्टिरूपा सा निर्माणे सत-
तोद्यता ॥ वाचामवाच्या वाग्देवी सदा
देवैर्नमस्कृता ॥ २४ ॥
टीका-सोई कुण्डलिनी जगत्के बहुत प्रकारसे
उत्साहपूर्वक रचना करनेकी रूप है और वाग्देवी है
अर्थात् उसीसे वाक्यका उच्चारण होताहै इस कुण्डलि-
नी देवीको देवतालोग नमस्कार करते हैं ॥ २४ ॥
मूलम्-इडानाम्नी तु या नाडी वाममार्गे
व्यवस्थिता ॥ सुषुम्णायां समाश्लिष्य
दक्षनासापुटे गता ॥ २५ ॥
• टीका-जो इडा नाम नाड़ी वामभागमें है वह सु-